लखीमपुर खीरी। सरकारी इंटर कॉलेजों की दशा सुधारने के दावे हकीकत से काफी दूर हैं। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के साथ ही कई अन्य समस्याएं भी हैं। धौरहरा के राजकीय इंटर कॉलेज में विषयवार शिक्षकों का टोटा है, जबकि कंप्यूटर व विज्ञान लैब का भी बुरा हाल है।
राजकीय इंटर कॉलेज धौरहरा में कक्षा 6 से 12 तक 983 छात्र पंजीकृत हैं। इन छात्रों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी इंचार्ज प्रधानाचार्य सहित चार शिक्षकों के कंधे पर है। कॉलेज में नौ सहायक और आठ प्रवक्ता शिक्षकों के पद रिक्त हैं। विषयवार शिक्षकों की बात करें तो हिंदी, सामाजिक विज्ञान, फिजिक्स, बायोलॉजी, गणित और शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों का टोटा है।
कंप्यूटर लैब बनाई जा रही है। विज्ञान लैब का जिम्मा शिक्षक जितेंद्र कुमार के कंधों पर है। इंचार्ज प्रधानाचार्य रजनीश वर्मा कॉलेज की व्यवस्था के साथ कक्षाओं में जाकर शिक्षण कार्य भी करते हैं। इंचार्ज प्रधानाचार्य ने बताया कि विषयवार कुल 17 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। पढ़ाई कराने के लिए सात प्राइवेट शिक्षक रखे गए हैं, जो बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
अभिभावक संघ देता है सात प्राइवेट शिक्षकों का मानदेय
धौरहरा के राजकीय इंटर कॉलेज में पंजीकृत छात्रों की शिक्षण व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अभिभावक संघ के ओर से सात प्राइवेट शिक्षक मानदेय पर रखे गए हैं। इन शिक्षकों का मानदेय अभिभावकों से शुल्क लेकर दिया जाता है।
फर्नीचर की कमी से टाट-पट्टी पर बैठते हैं छात्र
राजकीय इंटर कॉलेज में जहां शिक्षकों का टोटा है, वहीं छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर की भी कमी है। इसके चलते छात्र टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हालांकि कॉलेज में पेयजल के इंतजाम दुरुस्त हैं। पेयजल के लिए सबमर्सिबल पंप लगा है। दो हैंडपंप भी हैं। छात्रों को स्वच्छ और ठंडा मिले, इसके लिए वाटर कूलर व आरओ भी लगा है।
स्थानांतरण प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों की कमी पूरी होने की उम्मीद है। फर्नीचर की डिमांड पिछले साल भी गई थी, इस बार भी गई है। कमी को जल्द ही दूर किया जाएगा।
डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, डीआईओएस