लिया के एक पैलेस में आयोजित जनसुनवाई में मंचासीन ज्यूरी के सदस्य।
पलियाकलां। अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन से संबद्ध थारू आदिवासी और तराई क्षेत्र महिला मजदूर किसान मंच का सांगठनिक जनसुनवाई कार्यक्रम हुआ। बाहर से आए ज्यूरी सदस्यों ने थारू समुदाय की वनाधिकार से संबंधित समस्याओं को सुना। वन विभाग के फर्जी मुकदमों के बारे में भी बात की और मामले को प्रदेश व केंद्र में उठाने की बात कही।
यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रजनीश गंभीर ने कहा कि वन विभाग द्वारा करीब 2200 थारुओं पर फर्जी मुकदमे लादे हैं। जिनमें कई लोगों का निधन हो चुका है। वन विभाग वनाधिकार कानून नहीं मानता है, जबकि इसको 2006 में सरकार द्वारा पारित किया गया था। साफ तौर पर वनाश्रित लोगों को जंगल से जलौनी लकड़ी, जड़ी-बूटी, घास-फूस, औषधियां आदि लाने की बात कानून में लिखी है लेकिन वन विभाग ऐसा करने पर फर्जी मुकदमे लाद रहा है।
ज्यूरी सदस्यों ने सभी समस्याओं को सुना और इसको केंद्र और प्रदेश में उठाने की बात कही। कार्यक्रम में ज्यूरी सदस्यों के रूप में वनाधिकार कानून नियमावली ड्राफ्टिंग कमेटी की नंदिनी सुंदर, पूर्व सहायक निदेशक जनजाति निदेशालय समाज कल्याण डीएन सिंह, पूर्व डीजीसी लखीमपुर धर्मेंद्र शुक्ला, लखनऊ उच्च न्यायालय की अधिवक्ता नंदिनी वर्मा, अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार धनंजय उपाध्याय, यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोकालो गोंड व अमित सेन गुप्ता आदि थे।
लिया के एक पैलेस में आयोजित जनसुनवाई में मंचासीन ज्यूरी के सदस्य।