बांकेगंज। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों और अन्य संकटग्रस्त प्रजाति के वन्यजीवों के प्राकृतवास के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने एक करोड़ 64 लाख 85 हजार रुपये मंजूर किए हैं।
संयुक्त सचिव रवि शंकर मिश्र ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक/विभागाध्यक्ष को भेजे पत्र के में यह जानकारी दी है। पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि इस धनराशि का उपयोग केवल गैंडों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के प्राकृतवास के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए ही किया जाएगा। अन्य किसी मद में इसका उपयोग नहीं हो सकेगा।
गैंडो को उनके पुरखों की धरती पर फिर से बसाने के लिए वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना दुधवा नेशनल पार्क के बांकेताल में शुरू की गई। पहले चरण में आसाम के काजीरंगा नेशनल पार्क से दो नर और तीन मादा गैंडे लाकर करीब 34 किलोमीटर क्षेत्र में ऊर्जा चालित तारों से घेरकर बाड़ में रखा गया था।
अगले साल 1965 में नेपाल से 16 हाथियों के बदले चार मादा गैंडे लाकर बांकेताल में छोड़े गए। इससे इनके परिवार में बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 38 तक पहुंच गया। इसकी पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूटीआई ) देहरादून के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा किए गए दुधवा के गैंडों के डीएनए टेस्ट में हुई थी।
संख्या बढ़ी तो बनाया नया बाड़ादुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता और गैंडों की बढ़ती संख्या के चलते बांकेताल एरिया में बनाया गया गैंडों का घर छोटा पड़ने लगा था। इसके अलावा इनब्रीडिंग की समस्या से गैंडों की नस्ल बिगड़ने का खतरा भी बढ़ रहा था। इसे देखते हुए पार्क प्रशासन ने गैंडा पुनर्वास योजना फेज टू शुरू करने का निर्णय लिया। इसके तहत बेलरायां रेंज के छंगा नाला में करीब 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की नई बाड़ तैयार की। पहले इसमें चार गैंडे रखे गए थे।