आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत कराया जा रहा है 58 गोदामों का निर्माण
कृषि अवस्थापना निधि की जिला स्तरीय निगरानी समिति की हुई बैठक
गोदाम निर्माण के लिए एक फीसदी ब्याज दर पर दिलाया गया है ऋण
लखीमपुर खीरी। साधन सहकारी समितियां अब घाटे का नहीं कमाई का जरिया बनेंगी। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत समितियों को गोदाम निर्माण के लिए एक फीसदी ब्याज दर पर विशेष ऋण मुहैया कराया गया है। जनपद में 100 मीट्रिक टन क्षमता के प्रथम चरण में 58 गोदाम बनाए जा रहे है। इससे किसानों को घर बैठे अनाज भंडारण, कीटनाशक एवं उर्वरक के भंडारण की सुविधा मिल सकेगी।
बुधवार को डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में कृषि अवस्थापना निधि के तहत जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक ली। डीएम ने कहा कि जिन दस गोदामों का निर्माण पूर्ण हो गया, वहां थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (पीडब्ल्यूडी एवं आरईडी) से कराया जाए। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि अन्य समितियों को भी जागरूक करते हुए आत्मनिर्भर भारत (एआईएफ) योजना के तहत गोदाम निर्माण के लिए प्रोत्साहित करें। भंडारण कक्षों के निर्माण से समितियों को अनाज, कीटनाशक एवं उर्वरकों के भंडारण की सुविधा होगी। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने सहकारी समितियों में नाबार्ड की तरफ से गोदाम के निर्माण की समीक्षा कर संबंधित को जरूरी निर्देश दिए। डीडीएम नाबार्ड प्रसून ने बताया कि जनपद में 58 साधन सहकारी समितियों में नाबार्ड द्वारा 100 मीट्रिक टन क्षमता के एक-एक गोदाम का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें 10 गोदामों का निर्माण पूर्ण हो गया है। वहीं 48 गोदाम निर्माणाधीन हैं। गोदाम निर्माण के लिए प्रत्येक सहकारी समिति को नाबार्ड ने 16 लाख की धनराशि मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराई है। वहीं चार लाख की धनराशि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मार्जिन मनी के रूप में सहकारी समितियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। बैठक में उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्रा, सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता प्रमोद कुमार शुक्ला, जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह, जिला सहकारी बैंक के सचिव मौजूद रहे।
किसानों को गोदाम से ऐसे मिलेगा लाभ
किसानों की दिक्कतों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा आत्मनिर्भर योजना के तहत सहकारी समितियों में गोदाम का निर्माण कराया जा रहा है। इन गोदामों में किसान न्यूनतम शुल्क पर अपनी उपज का भंडारण कर सकेंगे। बाजार में जब फसल के अच्छे दाम मिलने लगेंगे, तब किसान अनाज को गोदाम से निकालकर बाजार में बिक्री कर सकेंगे। इससे उन्हें घाटे के अलावा अन्य परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। वहीं इन भंडारण कक्ष में कीटनाशक एवं उर्वरकों को भी रखने में सुविधा होगी।