दुधवा नेशनल पार्क में एक पेड़ पर बैठा दुर्लभ प्रजाति का लाल गर्दन वाला गिद्ध
बिजुआ। विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले गिद्धों की आबादी में बढ़ोतरी होने से वन विभाग के अधिकारी और पर्यावरणविद काफी उत्साहित हैं। बुधवार को गोला रेंज के मालपुर गांव के पास गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई दिया। इस झुंड में 60 से 70 गिद्ध थे।
डीएफओ संजय विस्वाल ने बताया कि बिजुआ क्षेत्र में काफी लंबे अरसे बाद एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गिद्ध दिखाई दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ गिद्धों का दिखाई देना उत्साहजनक है। पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या में काफी गिरावट आई थी। दरअसल पालतू पशुओं की बीमारी मेें दी जाने वाली डाइक्लोफिनेक दवा गिद्धों की मौत का कारण बन रही थी।
इन जानवरों की मौत होने के बाद उनके मांस को खाकर गिद्धों की मौत हो रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक दर्द और बुखार में प्रयोग की जाने वाली दवा डाइक्लोफिनेक पक्षियों के गुर्दे और लीवर को क्षतिग्रस्त कर देती है इसी से उनकी मौत हो जाती है। अब इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस दवा का इस्तेमाल बंद होने से गिद्धों की संख्या बढ़ना शुरू हुई है।