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Lakhimpur Kheri: पिछड़ा वर्ग को साधने की कवायद, रवि वर्मा लगातार तीसरी बार बने सपा के राष्ट्रीय महासचिव

Tue, 31 Jan 2023 02:49 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

गोला निवासी रवि प्रकाश वर्मा तीन बार सांसद रह चुके हैं। एक बार राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। रवि प्रकाश वर्मा को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय महासचिव बनाए रख सपा ने अपने पुराने चेहरों पर भरोसे की रवायत कायम की है।
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव रवि प्रकाश वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी (सपा) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नए गठन में भी पूर्व राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव रवि प्रकाश वर्मा का एक बार फिर से कद बरकरार रहा है। मूल रूप से पिछड़ा वर्ग को साध कर चुनाव में दम खम दिखाने वाली सपा ने एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रवि प्रकाश वर्मा को महत्व दिया है। हालांकि, भाजपा ने लखीमपुर खीरी में धौरहरा सांसद रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर कुर्मी वोटों पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है। 

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जिले की करीब 50 लाख की आबादी वाले खीरी जनपद में ओबीसी आबादी सबसे ज्यादा करीब 35 प्रतिशत है। इनमें कुर्मी बाहुल्य आबादी पहले नंबर पर है। इसी गणित को साधते हुए समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर अपने पुराने चेहरे रवि प्रकाश वर्मा पर अपना भरोसा बरकरार रखा है। 

तीसरी बार बने सपा के राष्ट्रीय महासचिव

गोला निवासी रवि प्रकाश वर्मा तीन बार सांसद रह चुके हैं। एक बार राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। रवि प्रकाश वर्मा को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय महासचिव बनाए रख सपा ने अपने पुराने चेहरों पर भरोसे की रवायत कायम की है। तीसरी बार महासचिव नियुक्त होने पर रवि वर्मा ने बताया कि हमारा उद्देश्य समाजवादी कार्यकर्ताओं का वैचारिक आधार पक्का करना है। स्थानीय स्तर परसमस्याओं के निस्तारण की क्षमता पैदा करनी है। जिससे कि पार्टी हर वक्त चुनाव की लड़ाई में तैयार रहे। 

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जातीय गणित की धुरी पर घूमती जिले की राजनीति

करीब 35 फीसदी पिछड़ा वर्ग की आबादी वाले खीरी जनपद में राजनीति की धुरी जातीय आंकड़ों के इर्दगिर्द ही घूमती है। मौजूदा वक्त में पिछड़ा वर्ग और कुर्मी बिरादरी से भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और धौरहरा सांसद रेखा वर्मा राजनीति के फलक पर चमक रही हैं। ऐसे में सपा पिछड़ा वर्ग पर अपनी पकड़ ढीली करने का कोई खतरा नहीं 
मोल लेना चाहती।

 हालांकि, पिछले दो लोकसभा और दो विधान सभा चुनाव में मोदी लहर के आगे जातीय समीकरण नेस्तनाबूद हो चुके हैं। 2014 में रवि प्रकाश वर्मा ने खीरी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। 2019 में उनकी बेटी पूर्वी वर्मा ने लोक सभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं थीं। दोनों ही लोकसभा चुनाव में भाजपा के अजय मिश्र टेनी ने बंपर जीत हासिल की थी। 
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