लखीमपुर खीरी। राजापुर गांव शहर की सीमा से सटा है। या ये कह सकते हैं कि अब ये शहर का ही हिस्सा है। राजापुर में कई सरकारी कार्यालय भी हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। लेकिन, यहां न तो शहर की सुविधाएं हैं और न गांव का माहौल।
कई जगहों पर कच्चे रास्ते व्यवस्थाओं को मुंह चिढ़ा रहे हैं। पेयजल, प्रकाश और सफाई व्यवस्था का हाल भी बुरा है। राजापुर को अब तक नगरपालिका में शामिल नहीं किया जा सका। सौजन्या चौक से खीरी मार्ग पर नहर पुलिया पार करते ही राजापुर ग्राम सभा शुरू हो जाती है। यहीं से शहर और गांव का अंतर दिखने लगता है। सड़क तक गंदगी बिखरी रहती है। गलियों के ऊबड़-खाबड़ रास्ते शहर से सटे इस गांव के विकास कार्यों की हकीकत बयां करते हैं।
यही हाल सैधरी और सुआगाड़ा का है। जिले के दूर गांवों से शहर में बसने की चाहत लेकर आए काफी संख्या में लोगों ने राजापुर में मकान बनवा लिए।
रहना भी शुरू कर दिया। ग्राम पंचायत होने की वजह से इन लोगों को शहर की तो सुविधा मिली नहीं, गांव की तरह प्राकृतिक वातावरण भी छिन गया।