लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा के पर्यटन को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध दिलाने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए कई देशों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ दुधवा पहुंचा। यह अध्ययन दल दुधवा और कतर्निया घाट वन्यजीव प्रभाग में भ्रमण कर यहां की पर्यटन सुविधाओं और संभावनाओं का पता लगाएगा।
प्रदेश के ईको पर्यटन स्थलों को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए जर्मनी, हॉलैंड और अमेरिका के टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर्स को लखनऊ बुलाया गया है। इस दल को लखनऊ के अलावा दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व में शामिल कतर्निया घाट वन्यजीव प्रभाग में स्थिति पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि यहां विभिन्न देशों से ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आ सकें।
इसी क्रम में पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रतिनिधि मंडल दुधवा पहुंच गया है। मंगलवार को दुधवा बंद रहने के कारण यह दल पलिया के एक होटल में ठहरा हुआ है। इस अध्ययन दल की दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर (एफडी) ललित वर्मा से सात दिसंबर को वार्ता होने की संभावना है। इस वार्ता के दौरान एफडी अध्ययन दल से दुधवा की पर्यटन सुविधाओं के बारे में विस्तार से चर्चा कर जानकारी देंगे। यदि अध्ययन दल कोई सुझाव देता है, तो उसके अनुसार और सुधार के कदम उठाए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय पहचान में ईको टूरिज्म जोड़ सकता है नई राह
ईको टूरिज्म से विश्वस्तरीय पहचान बनने से विदेश में दुधवा की ब्रांडिंग की कवायद है। इससे यहां विदेशी सैलानियों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इससे दुधवा का राजस्व बढ़ेगा और विश्वभर में दुधवा प्रसिद्ध भी हो जाएगा। विदेशी सैलानियों को बाघों की दहाड़ के साथ जलाशयों में पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देगी। दुधवा का घना जंगल हो या किशनपुर सेंक्चुरी। यहां बसने और आने वाले विदेशी पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करेंगी। उधर, बाघों की बढ़ती संख्या से भी दुधवा का ईको टूरिज्म नई उड़ान भरेगा।
हाईलाइटर
- केवल दुधवा में मिलते हैं बंगाल फ्लोरिकन पक्षी।
- 450 प्रजातियों के पाए जाते हैं परिंदे।
- 153 हैं बाघ।
- पांच प्रजातियों के हिरन एक साथ केवल दुधवा में।
-हाथियों का पंसदीदा प्राकृतवास
- देशभर में सबसे अनूठी जैवविविधता।
-गुणवत्तापूर्ण कार्बन की बाहुल्यता।
- दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में बसी थारू जनजाति की अनूठी संस्कृति के दर्शन।
- जलचर, थलचर और नभचर प्राणियों की भरमार।
- गेरूआ और घाघरा नदी में डाॅल्फिन की मौजूदगी।
- कतर्निया घाट वन्यजीव प्रभाग में मगरमच्छ प्रजनन केंद्र की ओर आकर्षित होंगे सैलानी।
- गैंडा पुनर्वास योजना फेज वन और टू में स्वछंद विचरण करते हैं गैंडे।
वर्जन
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के आने की जानकारी मिली है। फोन आया था, लेकिन, उनमें कौन-कौन सदस्य हैं, इसकी जानकारी नहीं हैं। हमारे और प्रतिनिधिमंडल के बीच सात दिसंबर को वार्ता होगी, उसमें हम प्रतिनिधिमंडल की अपेक्षाओं को सुनेंगे और अपने पास उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से सुझावों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। -ललित वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व