लखीमपुर खीरी। जिले में बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सीएचसी पर मौजूद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें स्कूलों का भ्रमण नहीं कर रही हैं। मोहम्मदी सीएचसी की टीम जहां पिछले डेढ़ माह से स्कूलों में नहीं गई, तो वहीं धौरहरा सीएचसी की टीम कुछ विद्यालयों में दो साल से नहीं गई।
आरबीएसके के तहत चार से दस साल तक के बच्चों को नियमित जांच और इलाज मुहैया कराने का नियम है, जिससे सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चों को कुपोषण से बचाकर सेहतमंद बनाने के लिए सीएचसी पर आरबीएसके कार्यक्रम के तहत डॉक्टर तैनात किए गए हैं। स्कूलों तक जाने के लिए वाहन भी मुहैया कराया गया है। इसके बावजूद टीमें स्कूलों में नहीं जाती है। जबकि टीम का काम स्कूलों में जाकर बच्चों की आंख, नाक, कान, दांत व त्वचा सहित एनीमिया और कुपोषण की पहचान करना है। बीमार मिलने वाले बच्चों को उचित इलाज मुहैया कराकर गंभीर स्थित में जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का प्रावधान है। मगर, कागजों तक सीमित अभियान से बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
त्वचा रोग से पीड़ित मिले 58 बच्चे
मितौली। सीएचसी अधीक्षक डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि आरबीएसके की दो टीमें हैं। दोनों ने पिछले माह 31 स्कूलों में पंजीकृत 2282 और 30 आंगनबाड़ी केंद्र के 1718 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसमें स्कूल के 68 व आंगनबाड़ी 66 बच्चे बीमार मिले। परीक्षण में त्वचा रोग से 58, दांत रोग से 42, नेत्र रोग से 12, विटामिन-ए की कमी के आठ, कान बहने के छह एवं दो बच्चे एनीमिया से ग्रसित मिले। सभी बच्चों को दवाएं मुहैया कराई गई हैं।
इन स्कूलों में नहीं गई टीमें
1- प्राथमिक विद्यालय कोरियाना अंबेडकरनगर के प्रधानाध्यापक प्रियवर श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले माह बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी कोई जांच नहीं हुई। शनिवार को डिप्थीरिया का टीकाकरण करने के लिए टीम आई थी।
2- रामवाटिका नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजय कुमार भारती व शिक्षक अमरेश ने बताया कि गत तीन माह से स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम स्कूल में नहीं आई हैं।
3-अटलनगर बारी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद अख्तर अहमद ने बताया कि गत छह माह से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं हुआ है, क्योंकि कोई टीम हीं नहीं आई।
4. बीआरसी भवन स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रवीण दीक्षित ने बताया कि पिछले कई महीनो से टीम के न आने से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हुआ है।
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साल 2021 से नहीं पहुंची स्कूल में टीम
सीएचसी क्षेत्र के एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने पर बताया कि हमारे स्कूल में साल 2021 के बाद से आज तक कोई टीम आई हीं नहीं। कागजों पर स्वास्थ्य शिविर लग गया हो तो हम नहीं कह सकते। वहीं एक अन्य शिक्षक ने बताया कभी कभार दवाएं बांटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम सिर्फ बीआरसी पर दवाएं रखकर चली जाती है। भाग की टीम जान करने नहीं पहुंची है
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मोहम्म्दी में डेढ़ माह से स्कूल नहीं गए डॉक्टर
सीएचसी क्षेत्र में कुल 218 विद्यालय हैं। इनमें 25 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 3499, 130 प्राथमिक विद्यालय में 12816 एवं 63 संविलियन स्कूलों में 15919 बच्चे पंजीकृत हैं। सीएचसी पर आरबीएस की दो टीमें हैं। एक में डाॅ. धर्मेंद्र वर्मा, अरुण, अमिता और दूसरी में डॉ. सोनी यादव, संजय, सीमा हैं। डॉ. धमेंद्र वर्मा ने बताया कि डेंगू, मलेरिया के अलावा वायरल बुखार के चलते गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं। इसलिए स्कूलों में टीमें नहीं पहुंच पा रहीं।
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यह है नियम
आरबीएसके के तहत हर सीएचसी पर दो स्वास्थ्य टीमें हैं। दोनों में दो डॉक्टर और दो पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती है। इनका काम सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल और आंगनबाड़ी का भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना है। इस दौरान टीमें मौके पर दवाएं देकर शनिवार को सीएचसी पर बीमार बच्चों को बुलाती हैं। सीएचसी पर इलाज न होने पर जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज तक भेजने का नियम है। साल में एक बार प्रत्येक टीम को क्षेत्र में स्थित दो आंगनबाड़ी केंद्र और एक विद्यालय का निरीक्षण करना अनिवार्य है। नियम यह भी है कि भ्रमण के समय यदि स्कूल में बच्चों की संख्या पंजीकरण से कम है, तो उस दिन विद्यालय के साथ एक आंगनबाड़ी केंद्र का भ्रमण किया जाए।