इन दिनों तिथियों के मुताबिक पूर्वजों का किया जाता है तर्पण और श्राद्ध, 25 सितंबर को होगा समापन
लखीमपुर खीरी। पितृ पक्ष की शुरूआत 10 सितंबर यानी शनिवार से हो रही है। अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक तिथियों के अनुसार लोग अपने पितरों को याद कर तर्पण करेंगे। मान्यता है कि इन दिनों पितरों का तर्पण करने से उनके आशीर्वाद से घर में समृद्धि आती है। समापन 25 सितंबर को होगा।
स्वर्गीय श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि हिंदू धर्म में पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए इन दिनों हवन, श्राद्घ और तर्पण करने की परंपरा है। हवन दान देवताओं के लिए और तर्पण दान पितरों को प्रसन्न करने के लिए होता है। इन दिनों पितरों के लिए पितृ तर्पण बेहद महत्वपूर्ण कर्म माना गया है।
उन्होंने बताया तर्पण करते समय पुरुषों के लिए तस्मैं स्वधा नम: और स्त्री वर्ग को जल देते समय तस्यै स्वधा नम: का उच्चारण करते रहें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होंगे। इससे घर परिवार में सुख शांति समृद्धि आएगी और पितृदोष दूर होंगे।
तारीख- तिथि व श्राद्ध
10 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध
11 सितंबर- प्रतिप्रदा का श्राद्ध
12 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध
13 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध
14 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध
15 सितंबर : पंचमी का श्राद्ध
16 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध
17 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध
18 सितंबर- अष्टमी का श्राद्घ
19 सितंबर-नवमी का श्राद्घ
20 सितंबर- दशमी का श्राद्घ
21 सितंबर- एकादशी का श्राद्घ
22 सितंबर- द्वादशी का श्राद्घ
23 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्घ
24 सितंबर- चतुर्दशी का श्राद्घ
25 सितंबर-अमावस्या सर्वपितृ श्राद्ध
तुलसी और पीपल की करें पूजा
पुरोहितों के मुताबिक, इन दिनों पीपल और तुलसी का पूजन करना चाहिए। तुलसी को जल देकर दीप जलाएं। शाम को घर के बाहर दीपक जलाकर रखें। इससे घर में खुशहाली आती है और पितृ प्रसन्न होते हैं। मंदिर एवं पीपल के पेड़ पर नित्य काले तिल के साथ जलांजलि दें। मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर देवताओं का वास होता है और दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। पितृ पक्ष में पीपल की उपासना करना शुभ माना जाता है । पितृ के तर्पण करने के साथ ही पीपल को जल अर्पित कर शाम को दीपक जलाना चाहिए।
380 अस्थि कलशों को अपनों का इंतजार
गोला गोकर्णनाथ। हिंदू परंपरा के अनुसार पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृपक्ष में तर्पण का विशेष महत्व है। इसके विपरीत नगर के मुक्तिधाम में 380 अस्थि कलश अपने वंशजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मुक्तिधाम के दो कमरों में ये अस्थि कलश मुक्तिधाम कमेटी के पदाधिकारियों ने लाल कपड़े की पोटली में बांधकर सुरक्षित रखे हुए हैं। मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैद्य रामजी रस्तोगी ने बताया कि जिन लोगों के पूर्वजों की अस्थियां मुक्तिधाम में रखी हुई हैं यदि मृतकों के वंशज पितृपक्ष में उन अस्थियों का विसर्जन नहीं करते हैं तो समिति अस्थियों का विसर्जन सामूहिक रूप से कराएगी। इस विषय पर शीघ्र ही बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। संवाद