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पितृ पक्ष : मुक्ति के लिए अपनों के आने का इंतजार कर रहे पितर

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मुक्तिधाम के पिंडदान कक्ष में रखीं अस्थियां।
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मुक्तिधाम में अपनों के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं 150 से अधिक अस्थिकलश
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घरवालों के न ले जाने पर मुक्तिधाम समिति कराएगी गंगा में विसर्जन, बैठक जल्द
लखीमपुर खीरी। शनिवार से पितृ पक्ष की शुरूआत हो चुकी है। पितरों को सद्गगति मिल सके और वह परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें, इसके लिए श्राद्ध करने से लेकर तर्पण करने की परंपरा है, लेकिन जिले में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने अपनों का दाह संस्कार तो कर दिया पर उसके बाद आगे की परंपरा निभाना भूल गए। शहर के मुक्तिधाम में रखे ऐसे 150 अस्थि कलश को अपनों की प्रतीक्षा है, जिससे उन्हें भी मोक्ष की प्राप्ति हो सके।
सेठघाट स्थित मुक्तिधाम में रहने वालों का कहना है कि इस समय 150 से अधिक अस्थि कलश पिंडदान भवन में रखे हैं, जिन्हें प्रतीक्षा है कि एक न एक दिन उनके बेटे-बेटियां या फिर अन्य कोई सगा संबंधी अस्थियां ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर मोक्ष दिलाएगा। इसी प्रतीक्षा में पिंडदान पिछले एक साल में भर गया है।
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पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि हर माह करीब 70-80 शवों का दाह संस्कार होता है। पिछले एक साल में करीब 700 अंतिम संस्कार हुए हैं, जिनमें से कुछ के बेटे-बेटियां समय पर आकर अस्थियां ले गए। मगर, बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो बाद में विसर्जन करने की बात कहकर इस तरफ का रास्ता ही भूल गए।

अस्थियां बीनने आए और न ही ले जाने
मुक्तिधाम पर क्रिया कर्म कराने वाले पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वैसे तो दाहसंस्कार के दो तीन दिन बाद ही अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर देनी जानी चाहिए, लेकिन समयाभाव होने पर एक-दो माह बाद भी विसर्जित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार तो लोग अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां बीनने तक नहीं आते। इस पर स्वयं अस्थियां संग्रह कक्ष में सुरक्षित रखवा दी जाती हैं, ताकी यदि कोई उनका अपना आए तो उन्हें दी जा सकें। इस तरह 150 अस्थि कलश एकत्र हो गए हैं।
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दस दिन में कोई नहीं आया तो खुद ही गंगा में करेंगे विसर्जन
सेठघाट पर क्रिया कर्म कराने वालों का कहना है यदि कोई अस्थि कलश नहीं ले गया तो पितृपक्ष के दिनों में ही इनको गंगा में प्रवाहित करा दिया जाएगा। पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि पितृपक्ष का समापन 25 सितंबर को होगा। यदि दशमी तक लोग अस्थिकलश नहीं ले गए तो जिला प्रशासन की अनुमति लेकर स्वयं गंगा में प्रवाहित करवा देंगे।
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