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Lakhimpur Kheri News: रोडवेज बसों में क्यूआर कोड से भुगतान करो, पाओ टिकट

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qr code new - फोटो : istock
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डिजिटल ढंग से भुगतान किए जाने से नहीं आएगी खुले पैसों और नकदी रखने की समस्या
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परिचायक और यात्रियों के साथ आए दिन होने वाली लूट की घटनाओं पर भी लगेगा विराम
लखीमपुर खीरी। रोडवेज बसों में क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने की व्यवस्था शुरू हो गई है। इससे यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए अब नकदी साथ ले जाने और खुले पैसों की समस्या से निजाद मिल गई है। वहीं इस सुविधा से परिचालकों और यात्रियों के साथ होने वाली लूट की वारदातों पर भी विराम लगेगा।
जिले में परिवहन निगम के दो बस अड्डे, एक लखीमपुर और दूसरा गोला है। इन दोनों डिपो से रोजाना करीब 170 बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित होती हैं। सफर के दौरान टिकट के लिए यात्रियों से लेकर परिचालक तक को खुले पैसों का इंतजाम करना पड़ता था। अक्सर फुटकर पैसे न होने पर यात्री टिकट के लिए दो और पांच सौ का नोट परिचालक को देते थे। फुटकर पैसों को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगता था। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब क्यूआर कोड से रुपये लेकर टिकट देना शुरू कर दिया है। ऐसे में टिकट के लिए न तो अब यात्रियों को खुले पैसों का इंतजाम करना होगा और न ही परिचालकों को।
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दोनों माध्यम से मिलेगा टिकट
परिवहन निगम ने रोडवेज बसों में डिजिटल सेवा के माध्यम से भले ही भुगतान करने की व्यवस्था शुरू कर दी है, लेकिन इसके साथ ही नगद रुपये देकर भी टिकट लेने की व्यवस्था जारी रहेगी। डिजिटल माध्यम से किया गया भुगतान सीधे मुख्यालय के खाते में पहुंचेगा।

ये होंगे लाभ
1. खुले पैसों को नहीं होगी दिक्कत।
2. परिचालकों के साथ लूट आदि पर लगेगा अंकुश।
3. यात्रियों को नगद कैश लेकर नहीं करनी होगी यात्रा।
4. फुटकर पैसों के लिए यात्री एवं परिचालकों में नहीं होगा विवाद।

फुटकर पैसे न होने पर यात्रियों को उतार देते थे परिचालक
खुले पैसों के अभाव में अक्सर मुसाफिर आठ, दस रुपये मूल्य का टिकट लेने के लिए 100 या 200 रुपये का नोट थमाते थे। ऐसे में फुटकर पैसे न होने पर परिचालक यात्रियों को बस से उतार देते थे। एक दूसरे पर खुले पैसे लेकर चलने की जिम्मेदारी डालने से दोनों के बीच विवाद तक होने लगता था, लेकिन डिजिटल भुगतान सेवा शुरू होने से इस तरह के विवादों पर विराम लगेगा।

100 रुपये देकर 90 की लाते थे रेजगारी
खुले पैसों के विवाद से बचने के लिए परिचालक रेजगारी परचून की दुकानों से लेकर आते थे। परिचालक बताते हैं कि 100 रुपये के बदले दुकानदार 90 रुपये खुले करके देते थे। इस तरह रोजाना 200 से लेकर 300 रुपये तक के फुटकर पैसे यात्रियों को वापस करने में खर्च हो जाते थे। अब डिजिटल सेवा प्रारंभ होने से काफी राहत मिलेगी।

दो दिन में 4100 का डिजिटल भुगतान
लखीमपुर डिपो में दो दिन में करीब 4100 रुपये का डिजिटल भुगतान कर यात्रियों ने टिकट लिए। नौ दिसंबर को 2079 और दस दिसंबर को 2098 रुपये का क्यूआर कोड के माध्यम से मुसाफिरों ने पेमेंट कर टिकट खरीदा।
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परिवहन विभाग ने डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू कर दी है। अब यात्री अपने मोबाइल से कोड स्कैन कर अपने खाते से सीधे भुगतान कर सकेंगे। भुगतान होने के बाद यात्री को मशीन से टिकट प्रिंट कर दिया जाएगा। यात्रियों से निवेदन है कि यदि वे क्यूआर कोड से भुगतान करना चाहते हैं तो अपने बैंक खाते में बैलेंस लेकर चले अन्यथा उन्हें नकद में ही टिकट खरीदना पड़ेगा।
- जोगेंद्र सिंह, एआरएम लखीमपुर डिपो
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