फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakhimpur Kheri News: बदलते मौसम में डायरिया और बुखार के बढ़ रहे मरीज

Wed, 19 Jul 2023 12:11 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
चिल्ड्रेन वार्ड में भरती बच्चे
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। बारिश के बाद निकल रही धूप से उमस बढ़ गई है। मौसम के इस बदले मिजाज का असर बच्चों पर दिखने लगा है। साफ-सफाई से लेकर खान पान में लापरवाही बरतने से बच्चे डायरिया और बुखार की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं। हर रोज 40-50 बच्चे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल की ओपीडी में सर्दी, जुकाम एवं बुखार के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चों का हाल बेहाल हैं, क्योंकि साफ सफाई से लेकर खान पान में लापरवाही बरतने से बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। बाल रोग की ओपीडी में रोजाना 40 से 50 बच्चे इन बीमारियों से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि बारिश के मौसम में जलभराव होने से मच्छर और जलजनित बीमारियां ज्यादा होती हैं, क्योंकि शहर हो या फिर गांव हर जगह साफ सफाई से लेकर खान पान के मामले में लापरवाही बरती जाती है। तापमान में उतार-चढ़ाव वाले इस मौसम में लोग दूषित भोजन एवं पानी का उपयोग करने से डायरिया एवं वायरल बुखार की चपेट में बच्चे आसानी से आ जाते हैं, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। इसलिए इस मौसम में बच्चों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
विज्ञापन

.....
इन बच्चों का हो रहा इलाज
बच्चा वार्ड में उल्टी दस्त और बुखार की चपेट में आकर दो वर्षीय सिद्धार्थ पुत्र जैनेंद्र निवासी लखीमपुर देहात, तीन माह की नशीमन पुत्री टेढ़े निवासी धौरहरा, छह वर्षीय अभिषेक पुत्र अखिलेश निवासी सूरत सरायं, दो वर्षीय निशा पुत्री शाहजहां निवासी हनिया टोला, सात वर्षीय आदर्श पुत्र रामजी देवकली एवं डेढ़ वर्षीय फरहान पुत्र महावार निवासी हिदायतनगर को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इनकी हालत में सुधार होना बताया जाता है।
.....
शुरुआत में बेहतर इलाज से जल्द ठीक होते हैं बच्चे
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि बारिश बीमारियां लेकर आती है। इसलिए, खासकर बच्चों को लेकर बेहद सावधान रहें। उल्टी दस्त एवं बुखार आदि आने के पहले ही दिन सरकारी अस्पताल लाकर दिखाएं। इससे समय पर इलाज शुरू होने से बच्चा जल्द स्वस्थ हो जाता है। अधिकतर लोग पहले अपने आप बच्चे को दवाएं देते हैं और फिर झोलाछाप को दिखाते हैं। इसी में छह से सात दिन लगा देते हैं। ऐसे में बच्चे की स्थित जब ज्यादा बिगड़ जाती है तब जिला अस्पताल लेकर आते हैं। ऐसे में बच्चे के ठीक होने में समय ज्यादा लगता है। कई बार रेफर करने तक की जरूरत पड़ जाती है। इसलिए किसी भी तरह की बीमारी होने पर सीधे सरकारी अस्पताल आकर दिखाएं
विज्ञापन

......
ये बरतें सावधानी
-. खुले में बिकने वाली खान- पान की चीजों से परहेज करें।
-. ताजा व गर्म भोजन ही करें, पानी उबालकर ही पिये।
-. खाना बनाने और खाने से पहले हाथ अवश्य धोएं।
-. घर के आसपास जलभराव न होने दें।
- घर में कूलर और गमले का पानी नियमित बदले।
-. टूटे बर्तन, टॉपर, फ्रिज की प्लेट की नियमित सफाई करें।
-. सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और फुल आस्तीन के कपड़े पहने।
- छह माह तक के बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराएं।
- छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को उल्टी दस्त शुरू होने पर ओआरएस घोल पिलाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें