पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद अब शुरू होगा सौंदर्यीकरण का काम
मैगलगंज। ऋषि पारासर की तपोस्थली प्राचीन तीर्थस्थल पारसनाथ धाम मढ़िया घाट जल्द ही पर्यटन के नक्शे पर नजर आएगा। पर्यटन विभाग ने इसे पर्यटन स्थल घोषित करते हुए कायाकल्प का निर्णय लिया है। पर्यटन विभाग लखनऊ मंडल के उपनिदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि जल्दी ही टीम भेजकर इस पौराणिक स्थल का सर्वे कराया जाएगा, इसके बाद इसके विकास का काम शुरू हो जाएगा।
क्षेत्र के भाजपा नेता अंकुर यादव ने पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर पारसनाथ धाम मढ़िया घाट को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग की थी। पर्यटन विभाग ने स्वीकृति देते हुए इसे पर्यटन स्थल घोषित कर दिया है। इस स्थल का सर्वे करने के लिए जल्द ही टीम आएगी। मंदिर परिसर में क्या कार्य होने हैं इसकी सूची बनाने के बाद सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू होगा। पारसनाथ धाम 350 बीघे में फैला है। गोमती नदी के किनारे शिवलिंग स्थापित है।
स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
पारसनाथ धाम की महिमा इसलिए और भी बढ़ जाती है क्योंकि यहां आदि गंगा गोमती उत्तरवाहिनी हो जाती है। मान्यता है कि ऋषि पारासर ने यहीं पर तपस्या की थी। यहां प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। कहा जाता है कि किसी मुगल शासक ने पारसनाथ मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी तो बिच्छूओं के झुंड ने आक्रमण करके उसे वहां से खदेड़ दिया था। मंदिर के पश्चिम दिशा की ओर सिद्ध बाबा आश्रम के नाम से ऋषि द्रोणी का आश्रम बताया जा जाता है। इसमें आज भी छोटी कुटिया में शिवलिंग मौजूद है। जहां पर ऋषि द्रोणी रहा करते थे, उसके चारों और घना जंगल और पेड़-पौधों की जटाएं जमीन में धंसी हुई हैं।
मढ़िया घाट पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। टीम भेजकर पूरे स्थल का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जल्दी ही यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।
- दिनेश कुमार, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग, लखनऊ मंडल