पलियाकला। पलिया-भीरा मार्ग पर करीब एक माह से भारी वाहनों और बसों के पहिये थमने से सब्जी और दैनिक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है। सब्जियों के दाम बढ़े हैं। मकान निर्माण की सामग्री महंगी हो गई है। प्रति हजार ईंटों की कीमत में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। भीरा, मैलानी, खुटार, पूरनपुर, पीलीभीत होकर बरेली जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गईं हैं।
शारदा नदी की बाढ़ से आठ जुलाई को भीरा-पलिया मार्ग पर अतरिया के पास पुलिया और सड़क कट गई थी, तब से मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक लगी है। कुछ दिनों बाद पुलिया की मरम्मत की गई, लेकिन काम पूरा होते ही नदी का पानी दोबारा सड़क पर बहने लगा। इस वजह से एक माह से मार्ग पर बसें और मालवाहक वाहन नहीं चल रहे हैं।
इन वाहनों को पलिया-मझगईं मार्ग से आना-जाना पड़ रहा है। इससे दूरी और खर्चा दोनों बढ़े हैं। पलिया जाने वाली बसें सात किलोमीटर पहले शारदा पुल तक ही जाती हैं। शेष दूरी को यात्री ई-रिक्शा और डग्गामार वाहनों से तय करते हैं।
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आलू, प्याज, टमाटर... सब महंगा
दूरी और खर्च बढ़ने का असर सीधे रोजमर्रा की जरूरत वाले समानों पर पड़ा। सब्जियां खासकर महंगी हो गईं। पहले 20 रुपये में बिकने वाला आलू अब 35 से 40 रुपये किलो में बिक रहा है। प्याज भी 40 से 50 रुपये किलो हो गया है। टमाटर भी तेजी पकड़कर 20 रुपये किलो से 80 रुपये किलो हो गया। भिंडी 20 रुपये से 40 रुपये किलो हो गई। वहीं परवल 40 से 80 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियां अब आम आदमी की थाली से दूर हो गईं हैं। किराने का सामान भी महंगा होने लगा है।
घर बनवाना भी हुआ मुश्किल
सब्जियों के साथ ही भवन निर्माण सामग्री भी महंगी हो गई है। ज्यादातर ईंट के भट्टे मैलानी में स्थित हैं। वहां से ट्रॉलियां भीरा मार्ग होकर पलिया आती थीं। अब इस मार्ग पर मालवाहक वाहन चलने बंद हैं। इससे ट्रॉलियों को लखीमपुर होकर आना पड़ रहा है। दूरी बढ़ने से अव्वल, दोयम, पीला, खड़ंजा सबकी कीमतों में एक से दो हजार रुपये प्रति हजार की बढ़त हो गई है।