लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगे एक साल हो गया, लेकिन चालू नहीं हो सकी है। शासन स्तर से लाइसेंस जारी न होने की वजह से यह यूनिट धूल फांक रही है। जबकि यूनिट को चालू करने के लिए कई बार शासन की टीम निरीक्षण कर चुकी है। सब कुछ ठीक मिलने के बाद भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया। इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल यानि आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायो प्रेसीपिटेट होते हैं। मरीज को जिस भी कंपोनेंट की जरूरत होगी, उसे चढ़ाया जाता है। जिला अस्पताल में यूनिट होते हुए भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को लखनऊ जाना पड़ रहा है। डेंगू, मलेरिया व अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने वाले मरीजों को प्लाज्मा, प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। मरीजों को जिला अस्पताल में ही इसकी सुविधा मिले, इसके लिए एक साल पहले ब्लड सेपरेशन यूनिट लगाई गई थी, लेकिन आज तक चालू नहीं हो सकी।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता करीब एक हजार यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की खपत होती है। अभी तक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने से एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है, लेकिन यूनिट चलने से एक यूनिट से चार मरीज लाभान्वित होंगे।
-
जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का निरीक्षण हो चुका है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। निरीक्षण में सब कुछ ओके मिला। भारत सरकार से ही इसका लाइसेंस जारी होना है।
- सुनील रावत, जिला औषधि निरीक्षक
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लाइसेंस शासन स्तर से जारी होना है। पिछले महीने ही इसका निरीक्षण हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही यह यूनिट शुरू हो जाएगी। इस मामले में एक बार फिर पत्राचार किया जाएगा।
-आरके कोली, सीएमएस जिला अस्पताल