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Lakhimpur Kheri News: डेढ़ सौ पंचायतघर खस्ताहाल, ब्ल़ॉक दफ्तर के चक्कर लगा-लगाकर ग्रामीण बेहाल

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पसगवां का जर्जर पंचायत घर
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लखीमपुर खीरी। जिले में अधिकतर पंचायतघर किसी काम के नहीं हैं। कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं इंतजाम नाकाफी...और तो और अफसर भी यहां मिलते। नतीजतन छोटे-मोटे काम के लिए भी ग्रामीणों को ब्लॉ़क दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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हालांकि प्रशासन का दावा 1164 जिले भर में 1033 पंचायत भवन बनाने का है लेकिन हकीकत कुछ और है। मौजूदा समय में करीब डेढ़ सौ पंचायतघर जर्जर हैं। बिजली की दिक्कत तो है ही, इंटरनेट कनेक्शन और अन्य इंतजाम भी मुकम्मल नहीं हैं। शायद यही वजह है कि अधिकारी यहां नहीं बैठते। ग्रामीण परिवार रजिस्टर की नकल, बच्चों का आधार कार्ड, जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र, विकलांग पेंशन, विधवा, वृद्धा पेंशन सहित सरकारी योजनाओं के दस्तावेज नहीं तैयार करवा पा रहे हैं।

पंचायती राज विभाग का दावा
जर्जर पंचायतघरों या पंचायत भवन विहीन गांवों में नए पंचायतघर बनाए जा रहे हैं । 1033 पंचायत भवन बनाए जा चुके हैं और 131 भवन निर्माणाधीन है। बन चुके पंचायत भवनों को बिजली कनेक्शन और इंटरनेट से लैस किया जा चुका है। इनमें पंचायत सचिवालयों का काम काज शुरू हो चुका है। थारू क्षेत्र के 12 गांवों को छोड़कर सभी में इंटरनेट कनेक्शन हैं। इन पंचायत भवनों से जन सुविधा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। 53 अन्य गांवों में जनसुविधा केंद्र बनाए जा रहे है।
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पसगवां में पंचायतघर नहीं
पसगवां। यहां पंचायतघर नहीं है। पुराने पंचायत घर की जमीन पर अनुसूचित जाति के ग्रामीणों के लिए एक दर्जन दुकानों का निर्माण कराया गया और वे वर्षों पहले आवंटित भी की जा चुकी हैं। नए पंचायत घर के निर्माण के लिए भूमि नहीं बची है। इंटरनेट कनेक्शन का डोंगल ग्राम विकास अधिकारी के आवास में लगाया जा रहा है।


निघासन में भरा है कूड़ा
निघासन। बल्लीपुर का पंचायत भवन खंडहर में तब्दील होने के कारण उसमें कूड़ा भरा हुआ है। कुछ हिस्से की मरम्मत कराकर उसमें पंचायत सहायक अपर्णा राजपूत बैठती है। प्रधान अनिल यादव ने बताया कि बजट न होने के कारण मरम्मत नहीं कराई जा सकी। ग्रामीण शमशेर, नीरज आदि ने बताया कि पंचायत सचिव नहीं आते।


पलिया में नहीं कोई सुविधा
पलिया की बबौरा ग्राम पंचायत में पंचायत भवन बनाकर छोड़ दिया गया है। यहां न तो कोई सुविधा है और न ही यहां प्रधान समेत कोई अधिकारी ही बैठता है। ग्रामीण आते तो जरूर हैं, लेकिन किसी के न मिलने के कारण 13 किलोमीटर का चक्कर काटकर ब्लॉक जाने को मजबूर होते हैं। पंचायत भवन के बाहर झाड़ियां भी उग आईं हैं।

मझौरा में नहीं बैठते अफसर
पलिया की मझौरा ग्राम पंचायत में पंचायत भवन बना हुआ है। लेकिन, यहां भी हालात ठीक नहीं हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कभी-कभार पंचायत भवन का ताला तो खुलता है लेकिन कोई अधिकारी यहां नहीं बैठता है। इसके चलते बिजुआ ब्लॉक जाना पड़ता है। वहां भी काम न होने पर पलिया तहसील आकर लोग अपने काम कराते हैं।
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पसगवां का जर्जर पंचायत घर

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