गौरीफंटा बार्डर पर बना कस्टम कार्यालय।
गौरीफंटा। एक तरफ देश के पुलिस व कस्टम समेत अन्य कार्यालयों को हाईटेक कर सारी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है, वहीं गौरीफंटा बॉर्डर पर वर्षों पुराने नियमों के तहत कस्टम, एसएसबी, पुलिस, अभिसूचना आदि के पक्के भवन नहीं बन पाए हैं। अधिकारी व कर्मचारी झोपड़ी में ही चल रहे कार्यालयों में बैठकर काम निपटाने को मजबूर हैं।
यहां पर मात्र वन विभाग के कार्यालय व निवास स्थान ही पक्के बने हुए हैं। झोपड़ी में बने कार्यालयों पर सर्दी, गर्मी व बरसात में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कस्टम, पुलिस व अभिसूचना के निवास भवन न होने से अधिकारी पलिया में रह रहे हैं और रोजाना बार्डर तक आते-जाते करते हैं। जिसके चलते 35 किलोमीटर दूर पलिया से कार्यालय पर सुबह 10 बजे पहुंचने पर बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
दूसरी तरफ थर्ड कंट्री के नागरिकों को बॉर्डर पर पहुंचने से सीपीओ के न होने से समस्या आती है। पुलिस के अधिकारी भी बॉर्डर से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर बनी कोतवाली में बने निवास पर रुकते हैं। एसएसबी को छोड़कर बॉर्डर पर किसी भी विभाग के अधिकारी रात में बॉर्डर पर नहीं मिलेंगे। इस बारे में कस्टम अधीक्षक डीके सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
शाम पांच बजे के बाद बॉर्डर पर लगता है वाहनों का रेला
बॉर्डर पर कस्टम अधिकारियों के न रुकने से शाम पांच बजे के बाद नेपाल जाने वाले मालवाहक वाहन नेपाल नहीं जा पाते हैं और बॉर्डर पर ही दूरदराज शहरों से आए मालवाहक वाहनों को रात गुजारनी पड़ती है। कस्टम अधिकारियों के बार्डर पर रुकने से उनको इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है और वह आसानी से रात में ही बॉर्डर पार कर नेपाल जा सकते हैं।
सीजर माल व अभिलेख रखने में आती हैं दिक्कतें
बॉर्डर पर कस्टम, चेकपोस्ट व पुलिस कार्यालय झोपड़ी में होने से इन कार्यालयों में सीजर माल व अभिलेख रखने में दिक्कतें आती हैं। अगर कार्यालय पक्के हों तो उसमें सीजर माल व अभिलेख भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
गौरीफंटा बार्डर पर बना कस्टम कार्यालय।