बांकेगंज। गर्मी की शुरूआत होते ही नहरें सूख गईं। इससे नहरों के भरोसे शाक-भाजी व गन्ना की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। आठ दिन से नहरों में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। सिंचाई न होने से फसलें सूखने लगी हैं।
बांकेगंज क्षेत्र में किसानों की सुविधा के लिए बनबसा बैराज से खीरी और सीतापुर ब्रांच नहरों में पानी आता है। इससे किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। क्षेत्र में बृहस्पतिवार को नहरों का पानी बंद कर दिया गया था। एक हफ्ता बीतने के बाद भी पानी नहीं आया। इन दिनों भीषण गर्मी पड़ने से सिंचाई के अभाव में फसलें सूखने लगी हैं।
जो किसान नहर के पानी के सहारे गन्ने की बुवाई करना चाहते हैं, वे पानी न आने से मायूस हैं। उन्हें महंगा डीजल खरीद कर सिंचाई और बोआई करनी पड़ रही है। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है।जेई अभिषेक सिंह ने बताया कि खीरी और सीतापुर ब्रांच नहरों में रोस्टर के मुताबिक पानी बंद किया गया है। जल्द ही पानी छोड़ा जाएगा।
किसान बोले- पानी न मिलने से चौपट हो रहीं फसलें
स्टेशनपुरवा निवासी किसान गोल्डी गोयल का कहना है कि भीषण गर्मी में सिंचाई न होने की वजह से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। सैकड़ों गांवों के छोटे किसान नहर के पानी के सहारे फसलों की सिंचाई करते हैं। खीरी और सीतापुर ब्रांच नहरें सूखी पड़ी हैं। उनकी खेती-बाड़ी चौपट हो रही है।
दौलतपुर गांव के किसान नेपाल सिंह का कहना है कि खेतों में गन्ना और सब्जी फसलों की बुवाई चल रही है। एक हफ्ते से क्षेत्र की दोनों नहरें सूखी हैं। किसान न तो गन्ना की बुवाई कर पा रहे हैं न ही खीरा, ककड़ी , तरबूज, खरबूजा आदि की फसल लगा पा रहे हैं।
किसान सुरेश कुमार का कहना है कि गर्मी में फसलों को पानी की जरूरत है। दोनों नहरें एक हफ्ते से सूखी हैं। सिंचाई न होने से गन्ना और सब्जियों की बुवाई ठप है। पानी के अभाव में गन्ना की बुवाई लेट हो रही है। धान फसल के लिए लोग खेतों में पलेवा भी नहीं कर पा रहे हैं।
गंगापुर गांव निवासी किसान शंकर लाल का कहना है कि नहरें सूखी होने से फसलों की सिंचाई करना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। खेती-बाड़ी करने वाले किसानों को महंगा डीजल खरीद कर फसलों की सिंचाई और बुवाई करनी पड़ रही है। नहरों में पानी न होने से मध्यम वर्गीय और छोटे किसान बेहद परेशान हैं।