गौरीफंटा बार्डर पर रोड के दोनों तरफ खड़ी बसें।
गौरीफंटा। गौरीफंटा सीमा तक आने जाने के लिए परिवहन सुविधा बदहाल है। गौरीफंटा में न सरकारी और न ही निजी बस स्टैंड है। जबकि नेपाल से सटा होने के चलते यहां बड़ी संख्या में भारतीय और नेपालियों का जाना-जाना रहता है। बस अड्डा न होने से यात्रियों को खुले आसमान में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
भारत-नेपाल सीमा के गौरीफंटा में बस स्टैंड के न होने से लोग यात्री सुविधाओं से वंचित हैं। गौरीफंटा बॉर्डर से रोजाना रोडवेज की करीब एक दर्जन बसें दिल्ली, मथुरा, जयपुर, कानपुर, लखनऊ समेत अन्य महानगरों के लिए जाती हैं। पलिया बस यूनियन की बसें भी दिनभर चलती हैं, लेकिन आज तक न तो रोडवेज का बस अड्डा बन पाया और न ही प्राइवेट बस स्टैंड।
बस स्टैंड के न होने से यात्री विश्राम गृह, शौचालय आदि भी नहीं है। यात्रियों को सर्दी, गर्मी व बरसात के मौसम में दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। एसएसबी की तरफ से बनाया गया शौचालय भी रखरखाव के अभाव में बंद पड़ा है। महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कतें होती हैं। पेयजल के लिए भी लोगों को भटकना पड़ता है।
गौरीफंटा बार्डर पर रोड के दोनों तरफ खड़ी बसें।
गौरीफंटा बार्डर पर रोड के दोनों तरफ खड़ी बसें।