संकटादेवी मंदिर में लगी भक्तों की लम्बी लाइल
लखीमपुर खीरी। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की गई। सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही। वहीं घरों में भी माता के भक्तों ने नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर विधि विधान से पूजा करते हुए मनौतियां मांगीं। दुर्गा मंदिरों में सुबह आरती के समय भक्तों द्वारा लगाए गए जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
15 अक्तूबर से शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो चुकी है। मंगलवार को तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का विधिवत पूजन किया गया। संकटा देवी मंदिर, वंकटा देवी मंदिर, भुइंया माता मंदिर, शीतला माता मंदिर में भक्तों की लंबी लाइनें लगीं रहीं। संकटा देवी मंदिर में शाम को होने वाली संध्या आरती में शामिल होने के लिए भक्त इस कदर पहुंचे कि मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं रही।
ज्योतिषाचार्य रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि देवी चंद्रघंटा मां पार्वती का विवाहित स्वरूप हैं। भगवान शिव से विवाह करने के बाद देवी ने अपने माथे पर आधा चंद्रमा सजाना शुरू कर दिया। इसलिए उनका नाम मां चंद्रघंटा पड़ा। देवी चंद्रघंटा न्याय और अनुशासन की देवी हैं। कहा कि जो भक्त मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा आराधना करता है, उसे माता की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख समृद्धि आती है।