पुलिसकर्मियों ने चंदा कर की थी मदद
माही का हाल देख रमियाबेहड़ के एसआई वीरेंद्र सिंह ने साथी पुलिसकर्मियों से चंदा एकत्र किया और खुद के वाहन से दीवान रामू सिंह के साथ बीमार बच्ची को लखनऊ में भर्ती कराकर इलाज शुरू कराया। चंदे की धनराशि महज जांच और जरूरी दवाओं में खर्च हो गई। जांच के बाद माही के दिमाग में पानी भरा होने की बात सामने आई।
ऑपरेशन के लिए मोटी रकम खर्च की बात सुनकर पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह उसे बीमारी की हालत में वापस घर ले आए। पिता संदीप ने बताया कि जितनी जमापूंजी थी, बेटी के इलाज में लगा दी है। ऑपरेशन का खर्च उठा पाना संभव नहीं है।
सामाजिक संगठन बढ़ाएं हाथ तो बच जाए जान
जिले में तमाम सामाजिक संगठन हैं जो मदद करने का दावा करते हैं, लेकिन माही की मदद के लिए एक भी सामाजिक संगठन ने पहल नहीं की है। सामाजिक संगठन पहल करें, तो शायद दर्द से तड़प रही माही का ऑपरेशन हो जाए। सामाजिक संगठनों की अनभिज्ञता लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है।