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Lakhimpur Kheri News: मोबाइल की लत बच्चों को बना रही मानसिक रोगी

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लखीमपुर खीरी। आधुनिक युग में मोबाइल जितना उपयोगी है, उतना ही घातक साबित हो रहा है। युवाओं को छोड़िए मोबाइल के चंगुल में बच्चे भी फंस रहे हैं। मोबाइल देखने की लत की वजह से पांच से 17 वर्ष तक के बच्चे और किशोर मनोरोगी हो रहे हैं। हर दिन करीब आठ से दस ऐसे मामले लेकर अभिभावक जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि मोबाइल चलाने वाले अधिकांश किशोर सोशल मीडिया को ही सब कुछ मानने लगते है। सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर डालते हैं। सेल्फी डालते हें। उसके बाद सेल्फी व रील्स पर कमेंट और लाइक्स देखते हैं। अधिक लाइक्स व कमेंट मिलने पर खुश होते हैं। उनको लगता है कि लोग उनको पसंद करते हैं। सोशल मीडिया पर फेमस होने पर बच्चे हमेशा मोबाइल में फंसे रहते हैं।
लाइक्स व कमेंट देखने के चलते वह रात-रात जागते हैं, इससे बुरा असर पड़ता है। इन दिनों ऑनलाइन गेम्स का भी क्रेज हैं। बच्चे-किशोर गेम पर पैसे लगाते हैं। डॉ. अखिलेश ने बताया कि रोजाना 100 से 120 मरीजों की ओपीडी की जाती हैं। जिसमें आठ से 10 बच्चों में मोबाइल की वजह से मानसिक समस्या देखने को मिलती हैं। कुछ बच्चे व युवा काउंसलिंग के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ को दवाएं देनी पड़ती हैं।
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एकदम न छीनें मोबाइल
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया अगर किसी का बच्चा मोबाइल देखने का ज्यादा आदी हो है तो उससे मोबाइल एकदम न छीनें। अगर रोजाना वह चार घंटे मोबाइल देखता है तो हर रोज 20 से 30 मिनट का समय घटाते जाएं। बच्चों के साथ समय बिताएं। उनको प्रेरित करने के लिए किस्से, कहानियां सुनाएं। उनके साथ खेलें, ताकि बच्चों का ध्यान मोबाइल पर न जाए। बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा न करें।

मोबाइल की वजह से किशोर ने दे दी थी जान
बृहस्पतिवार को सदर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पिपरिया राजापुर निवासी अतुल कुमार के 12 साल के बेटे पुष्कर राठौर ने मोबाइल की वजह से आत्महत्या कर ली थी। वह कई महीनों से ऑनलाइन गेम का आदी था, घंटों गेम खेलता था। स्कूल भी नहीं जाता था। बुधवार को पिता ने मोबाइल पर गेम खेलने से मना किया तो नाराज होकर घर में ही फंदे से लटककर उसने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद अभिभावकों को सबक लेना चाहिए। अगर उनका भी बच्चा इस तरह मोबाइल का आदी है, तो मनोचिकित्सक से जरूर संपर्क करें।
मोबाइल छीनने से उग्र हो जाता है बच्चा
मोहल्ला शास्त्री नगर में एक परिवार में आठ साल का बच्चा मोबाइल का इस कदर आदी है कि अगर किसी ने उससे मोबाइल छीन लिया तो वह गुस्सा हो जाता। घर में रखा सामान फेंकने लगता है। काउंसलिंग में पता चला कि पहले परिवार के सदस्य ही उसको घंटों मोबाइल दिखाते थे। धीरे-धीरे वह आदी हो गया।
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