लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया प्रभाग में प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफैंट के लिए मिले एक वर्ष पुराने अनुदान में 50 लाख रुपये का गड़बड़झाला सामने आया है। वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लिए बगैर अनुदान की रकम में से पचास लाख रुपये से दैनिक कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान कर दिया गया। इसमें मुख्य रूप से उपनिदेशक दुधवा (डीडी) की भूमिका सामने आ रही है। ऐसे में फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा ने डीडी दुधवा डॉ. रंगाराजू टी. को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वर्ष 2023-24 में प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफैंट के तहत 2.83 करोड़ की ग्रांट दुधवा नेशनल पार्क को दी गई थी। यह धनराशि संबंधित प्रोजेक्ट में खर्च होनी थी। सभी काम होने के बाद इसमें करीब 92 लाख रुपये की धनराशि बच गई थी। इसमें से 50 लाख रुपये की धनराशि से दुधवा नेशनल पार्क के डीडी डॉ. रंगाराजू टी. ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लिए बगैर दैनिक कर्मियों के मानदेय का भुगतान कर दिया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अमानगढ़, बहराइच, पीलीभीत समेत अन्य टाइगर रिजर्व में भी धनराशि बच गई थी, जिसे पीएमएफएस पोर्टल पर दर्शाया गया था। दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया प्रभाग में जब पूछताछ हुई तो बताया गया कि यह धनराशि सामाजिक वानिकी में खर्च की गई है, जबकि दुधवा नेशनल पार्क कोरजोन क्षेत्र है। जिसके चलते यहां सामाजिक वानिकी लागू ही नहीं है।
छानबीन हुई तो पता चला कि दुधवा प्रशासन ने बिना किसी आदेश और अनुमति के पिछले साल की ग्रांट से 50 लाख रुपये निकालकर दैनिक कर्मियों के मानदेय का भुगतान मनमाने तरीके से कर दिया। जब एफडी ने पीएमएफएस पोर्टल चेक किया तो पाया कि बची धनराशि में से 50 लाख रुपये गायब हैं।
प्राजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफैंट के तहत मिली ग्रांट में से अवशेष बची धनराशि से 50 लाख रुपये निकाल कर दैनिक कर्मियों को मानदेय के रूप में बांट दिया गया है। मामला संज्ञान के आने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस बाबत उपनिदेशक दुधवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ललित वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व