प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहते हैं जलाशय
सर्दी में दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, बफरजोन मैलानी रेंज की नगरिया समेत जिले के लगभग सभी जलाशय प्रवासी परिंदों से गुलजार हो जाते हैं। यहां हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर तराई के जलाशयों में आते हैं। यह पक्षी ठंडे देशों से यह पक्षी नवंबर से आना शुरू होते हैं और चार माह यहां प्रवास करने के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह तक अपने वतन लौट जाते हैं।
10 हजार किलोमीटर का सफर कर दुधवा पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी
प्रवासी परिंदे 10 हजार किलोमीटर का सफर तय करके साइबेरिया पहुंचते हैं। वहां से ये लद्दाख, भूटान,अरूणांचल प्रदेश औ कश्मीर होते हुए तराई के जलाशयों में पहुंचते हैं। यूक्रेन के प्रवासी परिंदे भी चीन, तिब्बत और लद्दाख होते हुए यहां पहुंचते हैं। गुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, मून हेन, ग्रे लेग गूज, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।
गर्मी की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों आने वाले प्रवासी परिंदो की वापसी शुरू हो गई है। अब तक बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे वापस जा चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयार में हैं। टाइगर रिजर्व के जलाशयों में तीन माह प्रवास के दौरान प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।
- बी प्रभाकर, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक / एफडी,दुधवा टाइगर रिजर्व।