लखीमपुर खीरी। परिवार नियोजन काे अपनाने में जिले की महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। परिवार नियोजन में महिला-पुरुष दोनों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए, लेकिन नसबंदी के मामले में पुरुष बहुत पीछे हैं। हर वर्ष जहां हजारों की संख्या में महिलाएं नसबंदी करा रही हैं तो पुरुषों का आंकड़ा अभी तक 100 के पार भी नहीं पहुंच सका है।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद वर्मा ने बताया कि नवदंपती को परिवार नियोजन के लिए समय-समय पर जागरूक किया जाता है। कभी कैंप लगाकर, तो कभी टीमों को घर-घर भेजकर लोगों को परिवार नियोजन का पाठ पढ़ाया जाता है। जागरूकता के चलते साल दर साल नसबंदी के आंकड़े बढ़ रहे हैं।
वर्ष 2022-23 में जनपद की 5983 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। वर्ष 2023-24 में लक्ष्य 6500 के सापेक्ष 103 फीसदी 6669 महिलाओं की नसंबदी की गई। पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष 17 अधिक पुरुषों ने नसंबदी कराई है। पिछले साल मात्र 24 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी। जबकि इस वर्ष 57 पुरुषों की नसबंदी की गई। संवाद
नसबंदी कराने पर मिलती है प्रोत्साहन राशि
नसबंदी के लिए प्रेरित करने को सरकार की ओर प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। पुरुष नसबंदी पर तीन हजार रुपये तो महिला नसंबदी पर करीब 2200 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। नसंबदी के लिए प्रेरित करने वालों को 400 रुपये दिए जाने का प्रावधान है। नसबंदी होने के बाद लाभार्थी के बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि भेजी जाती है।
परिवार नियोजन में अंतरा का सहारा ले रही महिलाएं
परिवार नियोजन के कई साधन है। इसमें नसंबदी के अलावा अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन, छाया गर्भ निरोधक गोली, गर्भ निरोधक आपातकालीन गोली आदि हैं। सबसे ज्यादा महिलाएं अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन का सहारा ले रही हैं। पिछले साल जनपद की 9724 महिलाओं ने अंतरा का सहारा लिया था। वर्ष 2023-24 में 14500 महिलाओं ने अंतरा का इंजेक्शन लगवाया। जबकि लक्ष्य 10 हजार का था।
-पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष नसबंदी का आंकड़ा बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुरुष नसबंदी का लक्ष्य 40 था, लेकिन 57 नसबंदी की गईं, जबकि महिला नसंबदी का लक्ष्य 6500 था, 6669 की नसबंदी की गई है। परिवार नियोजन के लिए दंपतियों को जागरूक किया जा रहा है।
-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ