मौसम की बेरुखी आम उत्पादकों पर भारी पड़ सकती है। फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी आम के पेड़ों पर बौर नहीं दिख रहे हैं।
आम के बौर आने की धीमी गति से आम उत्पादकों को चिंता सताने लगी है। गतवर्ष क्षेत्र के कई बागों में आम की फसल ठीक न होने से बाग मालिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था, जिससे अधिकतर बागवान कर्जदार हो गए थे। इस साल अब तक आम के पेड़ों पर बौर नहीं आने से बागवान काफी परेशान हैं। क्षेत्र के कई आम उत्पादकों का कहना है कि फरवरी में बौर आता है तो सब ठीक है लेकिन यदि मार्च में बौर आता है तो उपज में कमी आएगी, क्योंकि उस समय तेज धूप, हवा और कीटों का प्रकोप अधिक होता है जो फूल दे रहे बौर को काफी नुकसान पहुंचाता है।