पिछले पैंतीस वर्षो से नहीं बना है पुरुष चेयरमैन, इस बार सीट अनारक्षित थी
संवाद न्यूज एजेंसी
मैलानी। नगर के मतदाताओं ने पहले चुनाव को छोड़कर अब तक महिलाओं पर ही भरोसा जताते हुए लगातार छठी बार नगर पंचायत की बागडोर फिर महिला के हाथ में थमाई है। खास बात यह रही कि दो बार तो महिला के लिए आरक्षित न होने पर भी अध्यक्ष महिला ही चुनी गई और इस बार भी अनारक्षित सीट पर मतदाताओं ने कीर्ति माहेश्वरी पर भरोसा जताया।
दो अक्टूबर 1978 को मैलानी के नगर पंचायत बनने का गजट जारी होने के बाद 1988 में यहां पहला चुनाव हुआ। इसमें साफ-सुथरी और ईमानदार छवि के चलते रईस अहमद को मतदाताओं ने पहला चेयरमैन बनने का खिताब दिया। तबसे यहां किसी पुरुष को चेयरमैन बनने का मौका नहीं मिल सका है। आरक्षण प्रक्रिया लागू होने पर 1988 के बाद 1995 में हुए चुनाव में एससी रिजर्व होने पर भी पुरुष प्रत्याशियों को मात देकर भाजपा की फूलमती, वर्ष 2000 में एससी महिला में सपा की मिथलेश, 2006 में अनारक्षित महिला सीट पर सपा की कल्पना वाजपेई, वर्ष 2012 में ओबीसी महिला होने पर सपा की अनीता यादव और वर्ष 2017 में एससी सीट पर भी पुरुष प्रत्याशियों को पछाड़कर निर्दल सत्यवती चेयरमैन बनी थीं।
इस बार भी यहां अनारक्षित सीट पर भाजपा की कीर्ति माहेश्वरी ही चुनी गईं। हालांकि बसपा से मोहम्मद यूसुफ, आप से चंद्रभाल और निर्दल फहीम अहमद भी चुनाव मैदान में थे, लेकिन महिला प्रत्याशियों भाजपा की कीर्ति माहेश्वरी, सपा की अनीता यादव, निर्दलीय कल्पना वाजपेई के बीच ही कड़ा मुकाबला हुआ। कीर्ति माहेश्वरी को 2116, निर्दलीय कल्पना वाजपेई को 2095, सपा की अनीता यादव को 2045 वोट हासिल हुए। जबकि पुरुष प्रत्याशियों में बसपा के मोहम्मद यूसुफ को 252, निर्दलीय मोहम्मद फहीम को 79 और आम आदमी पार्टी के चंद्रभाल को 40 वोट मिले। इस प्रकार चुनाव लड़ रहे पुरुष प्रत्याशी कहीं दौड़ में भी नहीं नजर आए।