मदुरै से घर लौटकर अपने परिवार के साथ रामखिलावन और उनकी पत्नी
लखीमपुर खीरी। तमिलनाडु के मदुरै में ट्रेन में हुए अग्निकांड के समय बोगी में मौजूद काशीनगर के रामखेलावन सोमवार को घर पहुंच गए। माता-पिता को देख बेटे और परिजनों के चेहरे पर खुशी लौट आई। बोगी में आग लगने का वह भयावह मंजर अभी तक रामखेलावन की आंखों में बसा है। घटना में जान गंवाने वालों को यादकर उनकी आंखों से आंसू निकल आते हैं।
घटना के बारे में बताते हुए कहा कि शनिवार सुबह के पांच बजे वह ऊपर की सीट और पत्नी नीचे की सीट पर बैठी थीं। इसी समय बोगी में भगदड़ मच गई। बताया गया कि आग लग गई है। सभी लोग बाहर निकलने का प्रयास करने लगे। आग बढ़ती जा रही थी और गेट पर लगा ताला खुल नहीं रहा था। इसी समय भगवान की कृपा से कहीं एक लोहे की रॉड मिल गई। ताला तोड़कर हम लोग जैसे-तैसे बाहर आए।
सामान ट्रेन में रह गया। रामखेलावन के साथ उनकी पत्नी विद्यावती, परिवार की विदेश्वरी और लीलावती रामेश्वरम यात्रा पर गई थी। सभी सोमवार को सकुशल घर पहुंच गए।
सगे-संबंधियों का रहा आना-जाना
घर पहुंचने का पता चला तो पास-पड़ोसी और सगे-संबंधी हाल खबर जानने रामखेलावन के घर पहुंचे। सगे-संबंधियोंं के आने-जाने का सिलसिला सुबह से शाम तक चलता रहा। परिजनों के मुरझाए चेहरे भी खिल गए। हादसे के बाद से बेटा प्रशांत वर्मा और अन्य परिजन काफी परेशान थे। जिले के अन्य यात्री भी वापस घर पहुंच गए। सभी के घर जान-पहचान वालाें की आवाजाही रही।