लखीमपुर खीरी। कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को रिहा किए जाने के आदेश पर मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह शासन के आदेश से हैरान हैं। राज्यपाल को भ्रमित करके इस तरह का आदेश जारी कराया गया है, जो पूरी तरह अनुचित है।
निधि शुक्ला ने कहा कि उम्रकैद की सजा पाए अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी वर्ष 2012 से लगातार गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में रूम नंबर 15 और 16 में रह रहे हैं। जबकि, वह उत्तराखंड की हरिद्वार जेल के कैदी हैं। इस संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि वह इस समय दिल्ली में हैं। मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए आठ सप्ताह में जवाब मांगा है।
मुकदमे की वादी निधि शुक्ला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल करने के बाद पिछले 15 दिन से शासन और राज्यपाल को पत्र और मेल भेजकर वह लगातार अनुरोध करती रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट से अवमानना की याचिका पर फैसला आने तक कोई कार्रवाई न की जाए। इसके बावजूद राज्यपाल के आदेश पर कारागार प्रशासन और सुधार विभाग ने अमर मणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी को जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए। इससे उन्हें काफी हैरानी हुई है।
उनका कहना है कि सत्ता के दबाव में राज्यपाल को भ्रमित करके इस तरह का आदेश जारी कराया गया है। जबकि वह इस संबंध में पर्याप्त सबूत शासन को दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस आदेश से पीड़ित महिलाओं को न्याय की आस और विश्वास को धक्का लगा है।
वीडियो जारी कर लगाई गुहार
अमरमणि की रिहाई पर फैसला आने के बाद उन्होंने बृहस्पतिवार देर रात एक वीडियो जारी कर कहा कि राज्य सरकार को मामले में कुछ भी आदेश जारी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना चाहिये। उन्होंने राज्य सरकार समेत अपने शुभचिंतकों से अपील की है कि सरकार को इतनी जल्दी रिहाई के आदेश नहीं जारी करने चाहिये। कहा कि 20 वर्षों के संघर्ष की कुछ तो लाज रख लीजिए।
बीस साल पहले हुई थी कवयित्री मधुमिता की हत्या
करीब बीस साल पहले कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई थी। मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सीबीआई ने अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को दोषी पाते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में यह मुकदमा देहरादून स्थानांतरित कर दिया गया। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी 20 वर्ष एक माह और 20 दिन से जेल में हैं। मौजूदा समय में दोनों हरिद्वार जेल के कैदी हैं।