बेमौसम बारिश से किसानों की गेंहू और लाही की फसल बर्बाद हो गई है। क्षेत्रीय किसान परेशान हैं।
मौसम
की मार के कारण एक एकड़ में तीन से चार क्विंटल तक ही गेहूं निकल रहा है।
किसानों को गेहूं मड़ाई के लिए थ्रेसर मुश्किल से मिल पा रहे हैं। आलम यह
है कि बरसात के कारण भूसा पीला होने के कारण पशु भी अच्छी तरह नहीं खा रहे
हैं। प्रगतिशील किसानों की माने तो एक एकड़ गेहूं की फसल के लिए खेत में
जुताई से लेकर सिंचाई, खाद और फसल बोने तथा काटने तक 12 से 15 हजार रुपये
की लागत आती है। इस बार लागत भी हाथ नहीं आ रही है। किसान बर्बादी के कगार
पर पहुंच गए हैं। कचियानी निवासी नोखेलाल ने चार बीघा गेहूं बोया था,
जिसमें एक क्विंटल पांच किलो गेहूं निकला। उनके परिवार में छह लोग हैं। इसी
प्रकार लालजी ने दो बीघा गेहूं बोया, जिसमें मात्र 39 किग्रा गेहूं की उपज
हुई। किसान के परिवार में आठ सदस्य हैं। वहीं दूसरी ओर यहीं के निवासी
संबारी के परिवार की सदस्य संख्या दस है। चार बीघा गेहूं बोया था, जिसमें
केवल एक क्विंटल छह किलो गेहूं निकला। यहीं के निवासी चंद्र्रिका ने चार
बीघा जमीन में गेहूं बोया। गेहूं की पैदावार केवल एक क्विंटल 10 किग्रा
हुई। इस तरह क्षेत्र का हर किसान फसल की बर्बादी को लेकर परेशान हैं।