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मझरा-खैरटिया की तरह यह बाघ भी आदमखोर तो नहीं

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घटनास्थल पर मौजूद वन कर्मियों की टीम और ग्रामीण।
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वन्यजीव विशेषज्ञ बोले, सामान्यत: बाघ इंसान पर हमला करता है उसे खाता नहीं है
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बांकेगंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला रेंज में एक युवक का शिकार करने के बाद बाघ ने जिस तरह उसे खाया है, उससे बाघ के आदमखोर होने की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि घटना जंगल के बिल्कुल निकट हुई है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि गोला रेंज में बाघ द्वारा किसी इंसान का शिकार किए जाने की यह पहली घटना है। बाघ की गतिविधियों के अध्ययन के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
वनाधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर बाघ किसी इंसान पर यदि हमला करता है तो उसे खाता नहीं है। पुनर्भू ग्रंट के 32 वर्षीय मुशर्रफ पर बाघ ने न केवल हमला किया, बल्कि उसे खाया भी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मझरा-खैरटिया में वनाधिकारी तब तक निश्चिंत रहे जब तक बाघिन ने किसी इंसान को खाया नहीं। पहली बार मंदिर के पुजारी को बाघिन खींचकर ले गई और उसे खा गई। वनाधिकारी कहते हैं कि बाघ इंसान का शिकार करने बाद बाघ इंसानी खून का आदी हो जाता है।
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बाघ के स्वभाव में यह खास है कि बाघ हमेशा चुनौतीपूर्ण शिकार करता है। आसान शिकार उसी हालत में करता है जब वह शारीरिक रूप से अक्षम हो या उसके दांत आदि टूटे हो। फिलहाल वन विभाग के अधिकारी बाघ की गतिविधियों के अध्ययन में लगे हुए हैं और कई टीमें बनाकर उसकी निगरानी की जा रही है।
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अभी बाघ ने पहली बार किसी इंसान का शिकार किया है। इसलिए उसे आदमखोर कहना गलत होगा। फिलहाल उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। मृतक के परिजन को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। ग्रामीणों से अपील है कि वे जंगल की ओर न जाएं। बाघ दिखाई पड़ने पर इसकी सूचना वन विभाग को दें।
- संजय बिस्वाल, डीएफओ, साउथ खीरी
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