लखीमपुर खीरी। 29 साल पहले हुए खूनी खेल में एडीजे मोहन कुमार ने दोनाें ओर से दर्ज कराए गए केस में बुधवार को फैसला सुनाया। हत्या के चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दूसरी ओर से दर्ज कराए गए डकैती, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले 12 हमलावरों को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
एडीजीसी राजेश सिंह ने बताया कि मोहम्मदी थाना क्षेत्र के ग्राम लखनापुर निवासी बब्बन अली की गांव में ही तस्लीम व लखविंदर सिंह से पुरानी दुश्मनी चल रही थी। इसी रंजिश के चलते 29 जुलाई 1995 को जब इकरार अली के घर के बाहर बब्बन अली खाना खा रहा था, तभी तस्लीम, लखविंदर सिंह, दिलशाद और इरशाद ने एक राय होकर धावा बोल दिया। तस्लीम, लखनापुर के मजरा खेरियाजाट निवासी लखविंदर ने बब्बन अली को गोली मार दी थी। दिलशाद और इरशाद भी इस हत्याकांड में शामिल रहे थे।
बृहस्पतिवार को फैसला सुनाते हुए एडीजे मोहन कुमार ने चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। दूसरे पक्ष की ओर से प्रधान शब्बन अली, पूर्व प्रधान इसरार उर्फ तौले सहित 12 लोगों के खिलाफ आगजनी, लूटपाट हमले व बलवा की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें सुनवाई के बाद अदालत ने बृहस्पतिवार को क्रास केस मामले के आरोपी शब्बन प्रधान, इसरार उर्फ तौले, मारूफ खां, नरेश सिंह, पुत्तन सहित 12 लोगों को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
मृतक का बेटा बोला- मिला इंसाफ
बब्बन अली की निर्ममता से की गई हत्या को लेकर 29 साल बाद आए फैसले पर बब्बन के बेटे तौहिद अली ने खुशी जाहिर की और कहा कि अम्मी इस फैसले के बाद अपने आसूं नहीं रोक सकी। भरोसा हुआ है कि इंसाफ अभी जिंदा बचा है।