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खीरी सीट: इस बार सपा-कांग्रेस एकजुट तो हाथी भी मैदान में, बिगड़ेगा वोटों का गणित

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लखीमपुर खीरी। इस बार खीरी लोकसभा सीट पर वोटों का गणित बिगड़ना तय माना जा रहा है। सपा-कांग्रेस जहां एकजुट होकर लड़ रही हैं तो वहीं बसपा भी इस बार मैदान में है। जबकि पिछले चुनाव में सपा-कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और बसपा भी मैदान में नहीं थी। पिछले चुनाव में सपा को 34.4 तो कांग्रेस को 8.1 प्रतिशत वोट मिले। जबकि भाजपा को सर्वाधिक 53.6 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार सीट के समीकरण कुछ बदले नजर आ रहे हैं।
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इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन काे जिताने के लिए मैदान में जोर आजमाइश कर रही हैं। वहीं भाजपा अपने पिछले वोटबैंक को साधकर हैट्रिक लगाने की तैयारी से जुटी है। राजनीतिक के जानकार मान रहे हैं कि इस बार बसपा की इंट्री दलों का गणित बिगाड़ेगी। बसपा का भी अपना कैडर वोट अच्छा है।

शाहजहांपुर से अलग होकर खीरी लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। तब से 16 चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर इस बार 17वां चुनाव है। 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें ताे इस सीट पर 15 प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन 11 प्रत्याशी एक प्रतिशत भी वोट हासिल नहीं कर सके थे। इस सीट पर 2014 से भाजपा का कब्जा बना हुआ है। 2014 के चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक 37 प्रतिशत वोट मिले थे। उसके बाद 2019 के चुनाव में भाजपा के वोटबैंक में 16.6 प्रतिशत का उछाल आया।
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इस वोट बैंक को बरकरार रखने के लिए भाजपा हर बूथ जीतने, पन्ना प्रमुख समेत अन्य स्तर से चुनाव को मजबूत करने में जुटी है। वहीं, सपा व कांग्रेस एकजुट होकर अपने बूथों को मजबूत करने में जुटे हैं। बसपा अपने 2014 में मिले 26.7 प्रतिशत वोट बैंक को साधने के लिए मैदान में जुटी है। फिलहाल भाजपा के स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। अन्य पार्टियों के स्टार प्रचारकों के आने संकेत मिल रहे हैं।
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