लखीमपुर खीरी। शाहजहांपुर से अलग होकर वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई खीरी लोकसभा सीट का इतिहास काफी रोचक है। अब तक 16 बार हुए चुनाव में 169 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई लेकिन इनमें से 117 प्रत्याशी ऐसे भी थे, जो जमानत बचाने में भी विफल रहे। जमानत बचाने के लिए कुल वोटिंग में से से छह प्रतिशत वोट चाहिए होते हैं, लेकिन इन्हें मतदाताओं ने इतने वोट भी नहीं दिए।
इस सीट पर सात बार जीतने वाली कांग्रेस की भी एक बार जमानत जब्त हो चुकी है। 1984 में 70.4 फीसदी वोट हासिल करने वाली कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2004 के लोकसभा चुनाव में इतना खिसका कि पार्टी 2.8 प्रतिशत वोट पर ही सिमट गई। वहीं, 1977 के चुनाव में 59 प्रतिशत वोटरों का समर्थन पाने वाली भारतीय लोकदल पार्टी भी दो बार जमानत नहीं बचा पाई। 1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी बहुजन समाज पार्टी की भी जमानत जब्त हुई थी। संवाद
74 निर्दलीयों को पांच फीसदी से भी कम मिले वोट
इस सीट पर 16 बार हुए चुनाव में 43 ऐसे प्रत्याशी थे, जो विभिन्न दलों से चुनाव लड़े और जमानत नहीं बचा पाए। इनके साथ 74 ऐसे प्रत्याशी भी थे, जिन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और पांच प्रतिशत वोट भी नहीं पा सके।
एक चुनाव ये भी... किसी की जमानत जब्त नहीं
भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 1957 में पहली बार हुए चुनाव में 405123 वोटर थे, जबकि 154396 लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस चुनाव में लड़ने वाली किसी भी पार्टी की जमानत जब्त नहीं हुई थी।