लखीमपुर खीरी। देश को आजादी मिलने के 10 साल के बाद खीरी लोकसभा सीट शाहजहांपुर से अलग होकर स्वतंत्र बनीं। शाहजहांपुर से अलग होकर पहली खीरी सीट पर 1957 में चुनाव हुआ, लेकिन एक भी नेता ने निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरकर भाग्य नहीं अजमाया। दूसरे चुनाव में भी एक ही निर्दलीय मैदान में उतरे, उन्हें भी पब्लिक का सपोर्ट नहीं मिला। निर्दलीय चुनाव लड़कर संसद पहुंचने के लिए 71 नेताओं ने सपना देखा, लेकिन किसी की हसरतें पूरी नहीं हुईं। किन-किन निर्दलीय प्रत्याशी ने अपनी किस्मत आजमाई, किसे पब्लिक ने कितना सपोर्ट किया, आईए जानते हैं विस्तार से।
भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार 1962 के चुनाव में निर्दलीय राम गुप्ता चुनाव लड़े। उन्हें 6403 वोट ही मिले थे। वर्ष 1967 में एक भी निर्दलीय ने चुनाव नहीं लड़ा। 1971 में जानकी प्रसाद निर्दलीय चुनाव लड़े थे। उन्हें 4739 वोट मिले थे। 1977 में चंद्र भाल आर्य निर्दलीय में उतरे। उन्हें 12288 वोट ही मिले थे।
वर्ष 1984 में सात निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे। इसमें दरोगा सिंह ही ऐसे प्रत्याशी रहे जो 36555 वोट पाने में सफल रहे। अन्य छह निर्दलीय प्रत्याशी 10 हजार से कम वोट पाने में ही सिमट गए। राम सिंह को 4091, चंद्र भाल आर्य काे 2955, मेतादीन वर्मा को 2769, भाजू लाल शाह को 1269, हसन रहीस को 1220 और बाबू राम शुक्ला को 1056 वोट मिले थे।
वहीं, 1989 में निर्दलीय नजर इमाम को 17865, निर्दलीय में इंद्रराज सिंह को 7304, जाने जहां को 4384, सतीश चंद्र वर्मा को 3792, पियारबान को 3629, बजरंगी को 1802 वोट मिले थे। वहीं, वर्ष 1998 में एक भी निर्दलीय चुनाव में नहीं उतरा, जबकि वर्ष 1999 में निर्दलीय शान आलम खान को 6189, गोपाल बिहारी को 5404, नत्थू राम को 4476 और नरेश सिंह को 1074 वोट मिले थे।
वर्ष 2004 में निर्दलीय हरीश कुमार गुप्ता को 9456, निर्दलीय ओम प्रकाश वर्मा को 5670, शुखराजिया देवी को 5060, नरेश सिंह भदौरिया को 2323 वोट मिले थे। वर्ष 2009 में निर्दलीय मुजीब खान को 8782, मोहम्मद इलियास को 3965, बजरंगी लाल को 3859, अरविंद को 2585 वोट मिले थे। वर्ष 2014 में रामेश्वरी को 3514, निर्दलीय रामगोपाल मिश्रा को 2608 वोट मिले थे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय में मनोज कुमार सिंह को 5320, पारो किन्नर को 5315, कृष्ण कुमार को 2496, निर्दलीय अजय कुमार दीक्षित 1654 वाेट मिले थे। संवाद
1980 में 10 लोग चुनाव लड़े, वोटरों का सपोर्ट पाने में सभी रहे असफल
1980 के लोकसभा चुनाव में 10 उम्मीदवारों ने निर्दलीय रूप में भाग्य अजमाया, लेकिन वोटरों का सपोर्ट पाने में एक भी सफल नहीं हो सके। निर्दलीय भूपेंद्र सिंह ढिल्लो को 12236, चंद्र भाल को 6991, मंजू लाल शाह को 4387, बलदेव सिंह को 4026, उमा देवी मिश्रा को 3601, जय राम वर्मा को 2792, पोखराज हंस को 2026, प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव काे 1922, सीता राम मिश्रा को 1767 और संगम लाल को 1008 वोट ही मिले थे।
1991 में कौशल किशोर ऐसे निर्दलीय, जिन्हें 95771 वोट मिले थे
वर्ष 1991 में निर्दलीय कौशल किशोर को 95771, अब्दुल माजिद को 13503, विवेक को 5827, राम बिलास को 5079, जगमोहन सिंह वर्मा को 2708, बाबू राम को 1843, संतोष कुमार को 1508, जसपाल सिंह को 1322, सतीश चंद्र वर्मा को 1186, जहीर अहमद को 985 वोट मिले थे।
19 में थी संसद पहुंचने की ललक, 17 निर्दलीय 10 हजार वोट भी नहीं पा सके
1996 में संसद पहुंचने का सपना देखने वालों की लंबी फौज थी। 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई इसमें निर्दलीय मुजफ्फर अली काे 35621 और रसूल अहमद को 15100 वोट पा सके थे। अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों में एक भी 10 हजार वोट पाने का आंकड़ा भी नहीं छू सके। इसमें शमा बाबू को 9892, झब्बूलाल को 3474, मान सिंह को 1978, ओम प्रकाश को 1679, घनश्याम को 1198, वीरेंद्र सिंह राजवत को 1161, शत्रोहन लाल को 1161 और रफीउल्लाह को 1069, बांकेलाल को 823, मोहम्मद जुबेर को 743, चंद्र भाल वकील को 662, आचार्य ओम नारायन अवस्थी को 582, लालता प्रसाद मिश्रा को 500, मंगू लाल यादव को 473, अब्दुल माजिद को 354, बाबू राम शुक्ला को 277 और सुनील कुमार को 221 वोट मिले थे।