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कंधईपुर प्रकरण: मुश्किल से निकली आवाज, आंसुओं ने बयां किया दर्द

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लखीमपुर खीरी। घर छोड़कर एक माह से यहां-वहां भटक रहे ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां किया तो शब्द कम, आंखों से आंसू अधिक निकले। युवती सीमा ने रोते हुए कहा कि अब यह हालत हो गए हैं कि हमें मांगकर खाना पड़ रहा है। सड़कों पर रहते हैं। हमारी कोई मदद नहीं कर रहा।
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उसने बताया कि कपड़े भी मांगकर पहन रहे हैं। कपड़े खरीदने को रुपये भी नहीं हैं। दर्द बताते समय सीमा के रुंधे गले से आवाज तो मुश्किल से निकल रही थी। आंखों से आंसू अधिक बह रहे थे। साथ में आई महिलाएं भी रो रहीं थीं। पुरुषों की आंखों में भी आंसू थे। बताया कि वह लोग बृहस्पतिवार को ही जिला मुख्यालय आ गए थे। बागों में और सड़क पर रह रहे थे।

छोटे बच्चों और बेटियों के साथ रहे भटक
दुष्यंत ने बताया कि विवाद के बाद से छोटे बच्चों और जवान बेटियों के साथ भटक रहे हैं। दूसरे पक्ष के लोग दो से ढाई हजार हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि हमें गांव में रहने नहीं देंगे। हमारे 10 घर हैं। घरों से सब सामान लूट लिया। अनाज भी ले गए। नल तोड़कर उसमें पत्थर भर दिए हैं। हम लोग कहां जाएं।
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ढुलमुल रवैए से बढ़ा विवाद, महकमे की फजीहत भी हुई
मैलानी के कंधईपुर में करीब एक माह से बवाल चल रहा था। युवक की आत्महत्या के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आरख समाज के लोगों को घर से भगा दिया। इसकी सूचना भी थाना पुलिस को थी। गांव जाने के प्रयास पर विवाद भी हुआ लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इस विवाद ने 12 जून को बड़ा रूप ले लिया। मारपीट में पुलिस टीम पर भी हमला हुआ। ग्रामीणों से मारपीट करते हुए पुलिसकर्मियों की फोटो व वीडियो वायरल हुए। इससे पुलिस की खूब फजीहत हुई।
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