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International Tiger Day 2023: दुधवा टाइगर रिजर्व में धीमी गति से बढ़ रहा बाघों का कुनबा, इतनी है संख्या

Sat, 29 Jul 2023 12:19 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

मौजूदा समय में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 105 हो गई है। यह बढ़ोतरी बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती। बीते महीनों में कई बाघों की मौत भी हो चुकी है। 
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दुधवा में बाघ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में संरक्षण और संवर्धन की कोशिशों के बीच धीमी गति से बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। इसके साथ ही कई तरह के खतरे भी बढ़ रहे हैं। बाघ शिकारियों और तस्करों के निशाने पर हैं तो बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण इंसानों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है।

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वर्ष 1977 में जब दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना हुई थी, उस समय यहां करीब 50 बाघ थे। बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए वर्ष 1987 में दुधवा नेशनल पार्क में कतर्निया घाट वन्यजीव विहार को जोड़कर दुधवा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। मौजूदा समय में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 105 हो गई है। यह बढ़ोतरी बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती। 

वर्ष          - बाघों की संख्या

वर्ष 1977 - 50
वर्ष 1980 - 57
वर्ष 2000 - 77
वर्ष 2010 - 80
वर्ष 2014 - 68
वर्ष 2018 - 82
वर्ष 2022 -105

बाघों की गणना नहीं, होता है अनुमानीकरण

बाघों की गणना नहीं अनुमानीकरण किया जाता है। पूरे जंगल में कैमरे लगाकर बाघों की तस्वीरें ट्रैप की जाती हैं। इनकी धारियों का मिलान कर इनकी गिनती की जाती है। यह एस्टीमेशन हर चार साल बाद होता है। तराई में बड़ी संख्या में बाघों के गन्ने के खेतों में रहने के कारण यह बाघ कैमरों की नजर में नहीं आ पाते, जिससे इनकी गिनती नहीं हो पाती है। वर्ष 2022 में हुई गणना के संपूर्ण परिणाम अभी घोषित नहीं हो सके हैं। यदि खेतों में विचरण करने वाले बाघों को भी गिनती में शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या बढ़ सकती है।

बाघों पर बढ़ रहा खतरा

दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल करीब 2200 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से करीब 9900 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है। इस सीमित जंगल में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण बाघों के टेरीटरी बनाने के लिए जगह कम पड़ने लगी है। इससे बाघ जंगल से सटे खेतों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। इससे एक तो बाघ शिकारियों के निशाने पर आ रहे हैं। दूसरे मानव-बाघ संघर्ष की बढ़ती घटनाओं से इंसानों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए यहां खाद्य शृंखला को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत दुधवा के घास मैदानों और वेटलैंड का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है। इससे बाघों का भोजन शाकाहारी जीवों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि बाघों के सरंक्षण के साथ जंगल में पूरी पारिस्थितिकी का संरक्षण होता है। इसलिए बाघों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है। दुधवा में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी संतोषजनक है। बाघ और इंसानों के सहजीवन में कुछ कमी आई है लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन हर खतरों से निबटने में मुस्तैद है।
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