विलोबी हाल के सामने पानी टंकी परिसर में जमीन अधिग्रहण का विरोध जताते किसान : फाइल फोटो
लखीमपुर खीरी। राजापुर और पिपरिया गांव के किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध जताते हुए कहा कि अगर उनकी जमीनें चली गईं तो वह भूमिहीन हो जाएंगे। खेती ही उनका सहारा है। ऐसे में सरकार को यह प्रोजेक्ट निरस्त करना चाहिए।
सितंबर 2010 में आवास एवं विकास परिषद ने राजापुर और पिपरिया गांव के किसानों की करीब 316 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इस भूमि पर संचालित योजना का नाम एलआरपी मार्ग भूमि विकास एवं गृहस्थान का नाम दिया गया। 2017 में इसे शासन से मंजूरी मिली और 2020 में अधिग्रहण मूल्य का निर्धारण किया गया।
दोनों गांवों के किसान शुरू से ही जमीन अधिग्रहण के विरोध में थे। जिला स्तर से लेकर लखनऊ तक लगाई। जमीन जाने से भूमिहीन हो जाने का दर्द भी बताया। मगर अफसरों ने किसानों की एक नहीं सुनी। खतौनी पर आवास विकास का नाम दर्ज होते ही किसानों का सब्र जवाब दे गया और शुक्रवार को कई किसान विलोबी हाल के सामने पानी की टंकी पर चढ़ गए। इसके बाद अफसरों की नींद टूटी और प्रत्यावेदन मांगा गया है।
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थोड़ी सी जमीन... उसमें भी कई हिस्सेदार
राजापुर में रहने वाली गुड्डी के पास आठ बीघा जमीन है। रोजी-रोटी का यही एकमात्र सहारा है। देवेंद्र के पास भी सिर्फ चार बीघा जमीन है। इसमें चार हिस्सेदार भी हैं। लालू के पास भी सिर्फ चार बीघा जमीन ही है। राहुल वर्मा के पास छह और मेवालाल के पास सिर्फ एक एकड़ जमीन है। इसी तरह कई अन्य किसानों के पास भी पांच से सात बीघा जमीन ही है। इसी जमीन पर खेती-किसानी कर परिवार का पालन कर रहे हैं। जमीन अधिग्रहण से किसानों पर भूमिहीन हो जाने का खतरा मंडरा रहा है। जानकारी के बाद भी प्रशासन किसानों के हितों की अनदेखी करता रहा।