लखीमपुर खीरी। नवविवाहिता को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित करने और घर से निकालने के मामले में एफटीसी मजिस्ट्रेट रजत कुमार यादव ने दहेज लोभी पति और सास-ससुर को दोषसिद्ध पाया है। तीनों को दो वर्ष के साधारण कारावास और प्रत्येक पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी शहला समी ने अभियोजन पक्ष रखते हुए बताया कि शहर लखीमपुर के मोहल्ला हाथीपुर के रहने वाले शमशाद अहमद ने अपनी पुत्री शबनम की शादी दो मई 2017 को कोतवाली सदर के ही ग्राम महमदपुर कैमहरा निवासी सोहराब अली के साथ किया था, लेकिन शादी के एक महीने के बाद ही ससुराल में शबनम का उत्पीड़न शुरू हो गया।
सुलह समझौता पंचायत का भी कोई हल नहीं निकला। 25 जून, 2017 की शाम को ससुराल में शबनम की पिटाई के बाद उसे शौचालय में बंद किया गया था। शिकायत पर पहुंची राजापुर चौकी पुलिस ने नवविवाहिता को शौचालय से बाहर निकाला था। महिला थाने में पति सोहराब अली, ससुर इस्लामुद्दीन, सास हलीमा के साथ ही देवर शोएब, शाहनूर और दो अविवाहित ननद को भी आरोपी बनाया गया था।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी उसके साथ कचहरी में मारपीट हुई थी। इस मामलेे में सियासी दखल के आरोपों के बावजूद पुलिस ने जांच के बाद पति सोहराब अली, सास हलीमा और ससुर इस्लामुद्दीन को दोषी पाया था। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता के व्यक्तिगत अधिवक्ता नीरज रस्तोगी ने शबनम उसके पिता शमशाद के बयान अदालत में दर्ज करवाने के साथ ही सक्रिय पैरवी की थी। मंगलवार को फैसला सुनाते हुए एफटीसी मजिस्ट्रेट रजत कुमार यादव ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया, जिन्हें दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है
कचहरी में भी हुई थी मारपीट
दहेज उत्पीड़न के मामले में जब सुलह समझौते का प्रयास किया गया, तो मामला परिवार परामर्श एवं सुलह समझौते केंद्र में भेज दिया गया था, जहां मध्यस्थ बातचीत के दौरान हाथापाई हो गई थी। पीड़िता की बहन ने ससुराली जनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। समझौता केंद्र के कर्मचारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।