लखीमपुर खीरी। पहले बारिश नहीं होने से फसलों को नुकसान पहुंचा। अब नदियों में आई बाढ़ ने किसानों को बर्बाद कर दिया।
दोगुना मुनाफा कमाने के चक्कर में सैकड़ों किसानों ने साठा धान लगाया। जुलाई माह में फसल पककर तैयार खड़ी थी। किसान फसल काटने की तैयारी में थे, लेकिन बाढ़ ने साठ धान की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद कर दी। पलिया, निघासन, धौरहरा, अलीगढ़, संपूर्णानगर, ममरी, फूलबेहड़ और बांकेगंज क्षेत्र में हजारों एकड़ में साठा धान लगाया था।
धान के साथ मूंगफली और गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। अलीगंज के पचतौर गांव में लगातार हो रही बारिश से साठा धान की कटाई ना होने के कारण किसान परेशान हैं। उनकी चिंता बढ़ रही है कि वह फसल नहीं काट पाए, तो खाने के भी लाले पड़ जाएंगे।
पलिया क्षेत्र में बाढ़ से करीब 1500 एकड़ फसलें बर्बाद
पलिया। धान, गन्ना, मूंगफली आदि की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई। बाढ़ का पानी अभी भी किसानों के खेतों में भरा है। बाढ़ पीड़ित किसानों ने कहा है कि लगभग 1500 एकड़ फसल में बाढ़ का पानी भरा है। सरकार इसका मुआवजा दिलाए। एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने बताया कि करीब 12 से 14 सौ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सभी किसानों से कहा गया है कि वह पानी उतरने का इंतजार करें, उसके बाद फसल क्षति का आंकलन करने के बाद उनको मुआवजा दिलाया जाएगा। संवाद
बारिश के चलते नहीं हो पाई साठा धान की कटाई
अमीरनगर। लगातार हो रही बारिश में साठा धान की कटाई नहीं हो पा रही है। पका धान खेतों में गिर रहा है, इससे किसान चिंतित हैं। क्षेत्र के किसान सवदर खां, मोहम्मद उमर खां, रफीक खां, टीटू खां और सुमान खां ने बताया कि लगातार बारिश होने से धान की कटाई नहीं हो पा रही है। खेतों में पानी भरा हुआ है। यही हाल मूंगफली की फसल का है खुदाई का काम नहीं हो पाने किसान परेशान हैं। संवाद
-पैकेज-
खेतों से पानी उतरे तो शुरू हो फसलों के नुकसान का सर्वे
फसलों के नुकसान का पता लगाने के लिए सर्वे की तैयारियों में जुटा विभाग
लखीमपुर खीरी। बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का सर्वे में अभी शुरू नहीं हो सका है। उधर, कृषि विभाग ने किसानों से फसलों का बीमा कराने की अपील की है।
बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी से उफनाई शारदा, घाघरा, मोहाना, सुहेली आदि नदियों ने जिले के किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया। पलिया, निघासन, बिजुआ, धौरहरा इलाके के किसानों की धान, मूंगफली आदि फसलें बाढ़ के पानी में डूबकर बरबाद हो गई हैं। छोटी नदियों के बढ़े जलस्तर से भी तटवर्ती खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है। नुकसान की भरपाई को फसलों का सर्वे किया जाना है, मगर खेतों में पानी भरा होने से सर्वे में देरी हो रही है। जिला कृषि अरविंद चौधरी ने बताया कि खेतों से पानी उतरने पर ही सर्वे किया जा सकेगा। नुकसान कितना हुआ है, यह सर्वे के बाद ही पता चलेगा। राजस्व और कृषि विभाग की टीम के अलावा बीमा कंपनियां भी सर्वे करेंगी।
31 जुलाई तक करा सकते हैं फसल बीमा
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दैवीय आपदा की खरीफ सीजन की धान, मक्का, मूंगफली और उड़द की फसलों की सुरक्षा के लिए किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ले सकते हैं। फसलों का बीमा 31 जुलाई तक कराया जा सकता है।
बारिश का पानी भर जाने से धान की फसल गिरी। संवाद- फोटो : संवाद