बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में इको विकास समितियों ने शहद का उत्पादन उत्पादन शुरू कर दिया है। इसे ‘तराई अर्क’ का नाम दिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी ललित कुमार वर्मा ने दुधवा पर्यटन परिसर में शहद की बिक्री का शुभारंभ किया। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इको विकास समिति बंदर भरारी, बलेरा और मौरा के थारू जनजाति के लोगों की जंगलों पर निर्भरता कम करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की है। इसके तहत थारू जनजाति के लोगों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद थारू जनजाति के लोगों को इको विकास समिति के माध्यम से मधुमक्खी व बॉक्स उपलब्ध कराए गए। स्थानीय स्तर पर संबधित विकास समिति से जुड़े थारू जनजाति के लोगों ने शहद का उत्पादन शुरू कर दिया है। इसकी बिक्री का उद्घाटन दुधवा पर्यटन परिसर में एफडी ललित कुमार ने किया।
इस शहद को ‘तराई अर्क’ के नाम से जाना जाएगा। इसकी ब्रांडिंग भी की जाएगी। इस मौके पर डीडी दुधवा डॉ. रंगाराजू टी, वार्डेन महावीर सिंह, रेंज अफसर समेत इको विकास समिति सचिव मनेश्वर सिंह, वन दरोगा बाबूराम, अध्यक्ष पंडित लाल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के चंदन मिश्रा, और डब्ल्यूटीआई के राघवेंद्र प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
दुधवा के कर्मचारियों को बांटी जैकेट व कैप
पलियाकलां। दुधवा पर्यटन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीवों की सुरक्षा में तैनात दैनिक श्रमिकों को जैकेट, कैप और टार्च का वितरण किया गया। इस दौरान वार्डेन दुधवा महावीर सिंह, सभी रेंजर, इको विकास समितियों के अध्यक्ष, सचिव व सदस्य मौजूद रहे।