मोहम्मदी। नगर के मोहल्ला पश्चिमी लखपेड़ा में होली आपसी सौहार्द और गंगा जमुनी संस्कृति काे दर्शाती है। 50 वर्षों से मुस्लिम बहुल मोहल्ले में होली जलाई जाती है। दोनों समुदाय के लोग होली में आलू भूनकर खाने की परंपरा निभाते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग होलिका दहन में सहयोग करते हैं। इसे कस्बे की बड़ी होली कहा जाता है।
नगर के अच्छन मियां के घर के पास होली जलती है। पहले पूरा मोहल्ला सहयोग करके लकड़ी इकट्ठा करता था, लेकिन अब नगरपालिका की ओर से लकड़ी का इंतजाम किया जाता है। मोहल्ले के 65 वर्षीय लियाकत कहते हैं कि हम अपने बचपन से यहां पर होली जलते देख रहे हैं। दोनों समुदाय के लोग खुशियां मनाते हैं। मोहल्ला निवासी 60 वर्षीय अच्छन कहते हैं कि उनके दरवाजे के सामने होली जलती है। एक बार आग भी लग गई थी, जिसमें दरवाजे जल गये थे। रात में छत के ऊपर पानी भर कर रख लेते हैं, हादसा होने पर आग बुझाई जा सके। सभी लोग होली का त्योहार सौहार्द से मनाते हैं। एक-दूसरे को बधाई देते हैं। नगर के हिंदू भाई आखत डालने आते हैं, कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
मोहल्ले के सचिन कहते हैं कि यहां तीन ही घर यहां हिंदुओं के है। सभासद मोहम्मद हनीफ का कहना है कि इस त्योहार में सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। दोनों धर्मों के लोग होलिका दहन स्थल पर एकत्र होते हैं और एक-दूसरे को होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। पहले यहां की होली में भानपुर, बनवारी, बसविरवा, बबौरी, गरवापुर, शंकरपुर, छावनी, इस्लामाबाद, मगरेना और नगर के लोग होली आखत डालने आते थे।