कपिलश फाउंडेशन के अतीश शुक्ला व शिप्रा खरे-संवाद
लखीमपुर खीरी। आज हिंदी दिवस है। इस दिन अधिकांश विभाग और कार्यालय हिंदी को सर्वोपरि मानकर कई कार्यक्रम करेंगे। लंबे चौड़े व्याख्यान दिए जाएंगे, लेकिन असलियत में हिंदी के कई शब्दों को बोलने में भी परहेज किया जाने लगा है। सुबह के अभिवादन में नमस्ते की जगह गुड मॉर्निंग हो गया है। हाय, हेलो का चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया पर भी हिंदी के बजाय अंग्रेजी के शब्द अधिक दौड़ते दिखते हैं।
शहर में कई स्थानों पर लंबे समय से गलत शब्द लिखे हुए हैं। संबंधित विभाग और हिंदी के जानकार इन शब्दों को लेकर टोकाटाकी नहीं करते हैं। शहर ही रोडवेज पुलिस चौकी पर करीब छह माह पूर्व नया बोर्ड लगवाया गया था। इस बोर्ड पर रोडवेज की जगह रोडवेजे लिखा है, लंबे समय से इस शब्द पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। रोडवेज सही है या फिर रोडवेजे... लोग इस पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन टोकने की जरूरत नहीं समझते। इसी तरह कई अन्य स्थानों पर भी हिंदी के शब्द गलत लिखे गए हैं।
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हिंदी को बढ़ा रहा कपिलश फाउंडेशन, यतीश के नाम पांच विश्व कीर्तिमान
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के यतीश शुक्ला और उनका कपिलश फाउंडेशन कई वर्षों से हिंदी काे समृद्ध कर रहा है। इस संस्था के नाम हिंदी में भाषण, भागवत पुराण पढ़ने समेत पांच विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं। गोला निवासी यतीश शुक्ला और उनकी पत्नी शिप्रा खरे हिंदी के संवर्धन और उन्नयन के लिए अपनी संस्था के माध्यम से कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं। यतीश शुक्ला के नाम पहला रिकॉर्ड हिंदी में 148 घंटों के लेक्चर का है। दूसरा रिकॉर्ड उन्होंने 124 घंटे हिंदी की पुस्तकों का वाचन कर बनाया। तीसरा रिकॉर्ड हिंदी में ही लगातार 106 घंटे का भाषण का और चौथा 28 घंटे तक भागवत पुराण पढ़ने का है। पांचवा रिकॉर्ड फेसबुक लाइव के माध्यम से भाषण का है। फाउंडेशन की अध्यक्ष शिप्रा खरे ने साहित्य और हिंदी के उन्नयन के लिए वर्ष 2021 में देश भर के 450 कवियों के साथ मिलकर लगभग 128 घंटों के विश्व के सबसे लंबे कवि सम्मेलन और मुशायरे का रिकॉर्ड संस्था के नाम बनाया था।