1830 में हुई मंदिर का जीर्णोद्धार
बावजूद इसके राजा ने अपने राज्य में इस प्रतिमा को स्थापित करने का प्रयास किया। लेकिन, हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित नहीं किया जा सका। प्रतिमा इतनी भारी हो गई कि तमाम लोग उसे उठाने में असमर्थ रहे। इसके बाद राजा अमर सिंह ने पुजारी से कहा कि आप जहां चाहें राज्य में इसे स्थापित कर सकते हैं। इस पर पंडित राम गुलाम अवस्थी के कहने पर राजा ने इस मंदिर का निर्माण कराया, जिसका जीर्णोद्धार सन् 1830 में राजा अमर सिंह के द्वारा किया गया।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां 31 जनवरी से 7 फरवरी 2023 में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा उपाध्यक्ष और धौरहरा सांसद रेखा वर्मा व विधायक विनोद अवस्थी भी शामिल हुए थे।
पिछले साल उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के जीणोद्धार के लिये 50 लाख रुपये भी दिये थे। इसके तहत मिट्टी पटान, टायल सुंदरीकरण के रूप में खर्च किया गया। यहां दीपावली के एक दिन पहले कार्तिक में हनुमान जयंती के रूप में मनाई जाती है। हर मंगलवार को यहां मेला लगता है। मंगल और शनिवार को दूर दराज से काफी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।