अमीरनगर। सत्संग समाप्त हो गया था। 12 साल की प्रीति दादी यशोदा (62) का हाथ पकड़कर बस की ओर आ रही थी। अचानक भगदड़ मच गई। जोर का धक्का लगा और प्रीति का हाथ छूट गया। भीड़ दादी को रौंदती हुई निकल गई। भगदड़ शांत होने के बाद उसे दादी का शव मिला.. फोन पर घटना बताते हुए प्रीति रोने लगी। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में यशोदा का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मोहम्मदी कोतवाली के गांव चंदनापुर निवासी बस एजेंट दिनेश रविवार को हाथरस सत्संग के लिए बस लेकर गया था। इसी में गांव बहादुरगंज निवासी यशोदा अपनी पोती प्रीति, द्वारिका प्रसाद, उपासना और रीता के साथ सत्संग में गई थीं। मृतका की पोती प्रीति ने बताया कि सत्संग समाप्त होने के बाद वे लोग बस की तरफ जा रही थीं। तभी अचानक भगदड़ मच गई।
वह दादी से बिछड़ गई। तलाश करने पर दादी का पता चला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। प्रीति ने घर पर फोन से सूचना दी। बुधवार शाम यशोदा का शव गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार कराया गया। अंतिम संस्कार के समय नायब तहसीलदार सर्वेश कुमार यादव, सीओ मोहम्मदी अरुण कुमार सिंह, प्रधान कयूम बेग सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
लाशों के बीच साड़ी से पहचाना दादी को
12 साल की बालिका प्रीति के लिए यह सब भूलना आसान नहीं है। बिलखते हुए उसने बताया कि दादी उससे हमेशा के लिए दूर चली गईं। भगदड़ के बाद वह दादी को खोज रही थी। बिखरी पड़ीं कई लाशों के बीच दादी का कुछ पता नहीं चल रहा था। काफी देर की खोजबीन के बाद उसने साड़ी से अपनी दादी की पहचान की।
10 वर्ष से भोले बाबा की अनुयायी थीं यशोदा
मृतका के पुत्र संजय ने बताया कि मां 10 वर्षों से सत्संग सुनने के लिए जाया करती थीं। पहली बार 12 वर्षीय पोती प्रीति को साथ में लेकर गई थीं। सत्संग में भगदड़ का पता चला तो वह अलीगढ़ पहुंचे। शव लेकर शाम के समय गांव पहुंचे। बताया कि सत्संग में आसपास गांवों से भी लोग गए थे।
गांव में मौजूद नायब तहसीलदार और सीओ मोहम्मदी अरुण कुमार सिंह।संवाद
गांव में मौजूद नायब तहसीलदार और सीओ मोहम्मदी अरुण कुमार सिंह।संवाद
गांव में मौजूद नायब तहसीलदार और सीओ मोहम्मदी अरुण कुमार सिंह।संवाद