पलियाकलां। मूलभूत जरूरत शिक्षा के मामले में पलिया क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। यहां इंटर कॉलेज तो कई मिल जाएंगे, लेकिन इसके बाद की पढ़ाई के लिए एक मात्र सहारा राजकीय डिग्री कॉलेज है। पोस्ट ग्रेजुएशन करने वालों को दूसरे शहरों की राह देखनी होती है। साल दर साल बीते, सरकारें आईं और गईं लेकिन इस समस्या की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पलिया, संपूर्णानगर, मझगईं, चंदन चौकी के युवाओं को पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए दूसरे जनपदों या फिर मंडलों में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। पलिया राजकीय महाविद्यालय में वर्ष 2016 में काफी जद्दोजहद के बाद एमए की कक्षाओं के संचालन की स्वीकृति मिली थी। 2022 में यहां समाजशास्त्र विषय के दो शिक्षकों के पद भी निकाले गए थे, लेकिन वास्तविकता में कुछ नहीं हुआ। कक्षाओं का संचालन शुरू कराने के लिए किसी स्तर से कोई पहल नहीं हुई।
कालेज प्रबंधन के अनुसार, इसको लेकर कई बार पत्राचार भी किया था, लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्धीकरण न होने के कारण कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ। वक्त बीता और डिग्री कॉलेज का लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्धीकरण भी हो गया, लेकिन एमए की कक्षाएं फिर भी शुरू नहीं कराई गईं।
राजकीय महाविद्यालय में केवल दो ही शिक्षक
पूरे राजकीय महाविद्यालय में केवल दो शिक्षक हैं, जिसमें एक कार्यवाहक प्राचार्य का पद भी संभाले हैं। इतना बड़ा क्षेत्र होने के बाद भी कोई पीजी कालेज नहीं है। थारू क्षेत्र के साथ ही मझगईं और संपूर्णानगर क्षेत्र के युवा बाहर जाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
महाविद्यालय तक को तरसते हैं इलाके के युवा
मझगईं-संपूर्णानगर। पलिया-निघासन के बीच बसे मझगईं कस्बा के आसपास कोई भी महाविद्यालय नहीं है। सैकड़ों युवा गरीबी के चलते पढ़ने से वंचित रह जाते हैं। अभिभावक बेटियों को डर की वजह से बाहर नहीं भेज पाते हैं। प्राइवेट बसों से पलिया या फिर अन्य जगहों पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए युवा जाते हैं। इसमें छात्राओं को सबसे ज्यादा दिक्कतें होती हैं। मझगईं कस्बा में महाविद्यालय बनवाने की मांग भी अभिभावक करते हैं। संपूर्णानगर में भी महाविद्यालय नहीं है। यहां से युवा इंटर पास करने के बाद पलिया या फिर बाहर जाने को विवश हैं।
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पहले कानपुर यूनिवर्सिटी से महाविद्यालय संबद्ध था, उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया है। पत्राचार किया था लेकिन अभी तक एमए की कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ है। पत्राचार का काम जारी है। शिक्षकों और स्टाफ की कमी है। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश शुक्ला, प्रभारी प्राचार्य
राजकीय महाविद्यालय पलियाकलां