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गोवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च पर एक भी लावारिस पशु को नहीं मिला आसरा

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बरवर में निर्माणाधीन कान्हा गोआश्रय स्थल। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। नगर निकाय क्षेत्रों में लावारिस गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने के लिए 2020 से बनाए जा रहे कान्हा गोआश्रय स्थलों का दो साल बीतने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अब तक एक भी लावारिस गोवंशीय पशु को इनमें आसरा नहीं दिया जा सका है। बावजूद इसके जिम्मेदार खामोश हैं।
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जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में काफी संख्या में लावारिस गोवंशीय पशुओं को देखते हुए गांवों में बड़े पैमाने पर कम बजट वाले अस्थायी गोआश्रय स्थलों का निर्माण कराया गया है, तो वहीं शहरी क्षेत्रों में भारी भरकम बजट खर्च कर कान्हा गोआश्रय स्थलों का निर्माण कराया जा रहा है। प्रत्येक कान्हा गोआश्रय स्थल के निर्माण पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसकी पहली किस्त के तौर पर 82-82 लाख रुपये नगर निकायों को दिए जा चुके हैैं। इसके बाद दूूसरी किस्त भी नगर निकायों को मिली है, लेकिन भारी भरकम धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद गोआश्रय स्थलों के निर्माण की प्रगति शून्य है, इसके विपरीत ग्राम पंचायतों में औसतन 20 लाख की लागत से बनाए गए गोआश्रय स्थलों में लावारिस पशुओं को संरक्षित किया जा चुका है।
कान्हा गोआश्रय स्थलों के लिए नगर पालिका लखीमपुर, नगर पंचायत मैलानी व बरवर को धनराशि मिल चुकी है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार कान्हा गोआश्रय स्थलों का निर्माण करा रहे हैं, जिससे बजट में से कुछ हिस्से का बंदरबाट किया जा चुका है। इस कारण कहीं बाउंड्री बन पाई है तो कहीं कवर्ड एरिया में पिलर खड़े किए गए हैं, लेकिन टिनशेड नहीं पड़ा है।
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जिले के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कान्हा गोआश्रय स्थल के निर्माण पर जितनी रकम खर्च की जा चुकी है, उससे गांवों में अब तक हजारों गोवंशीय पशुओं का संरक्षण किया जा सकता था। उन्होंने नगर निकायों को मिले बजट में हेरफेर किए जाने की आशंका भी जताई।
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कान्हा गोशाला तीन वर्ष बाद भी अधूरा, किसान परेशान
पसगवां/बरवर। नगर पंचायत बरवर में तीन साल पहले कान्हा गोआश्रय स्थल का निर्माण प्रारंभ कराया गया था। पहली किस्त खर्च की जा चुकी है, दूसरी किस्त मिलने का इंतजार हो रहा है। इस बीच कुछ लोगों ने गोआश्रय स्थल की जमीन पर फसलों की बुआई शुरू कर दी है। ईओ सपना भारद्वाज ने बताया कि कान्हा गोशाला का स्वीकृत बजट 1.63 करोड़ है, जिसके सापेक्ष अभी तक 82 लाख रुपये ही मिले हैं। शेष धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
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मैलानी में दूूसरी किस्त भी मिली, लेकिन काम अब भी अधूरा
मैलानी। नगर पंचायत में कान्हा गोआश्रय स्थल का निर्माण कराने के लिए पहली किस्त के तौर पर 82.95 लाख रुपये मिले थे, जिससे बाउंड्री, स्टोर रूम व पिलर बनाए गए हैं। जबकि कुछ दिन पहले दूसरी किस्त भी मिल चुकी है। इससे दोबारा काम शुरू होने की उम्मीद है। ईओ राजेश चौधरी ने बताया कि करीब आठ बीघा क्षेत्रफल में गोआश्रय स्थल बनाया जा रहा है। 2020 में निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। पहली किस्त से काम कराया जा चुका है। दूूसरी किस्त कुछ दिन पहले मिली है, जिससे शेष कार्य पूरा कराया जाएगा।
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गौरिया में तो अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ
बेहजम। नगर पालिका लखीमपुर द्वारा कान्हा गोआश्रय स्थल निर्माण के लिए 2019-20 में ब्लॉक बेहजम की ग्राम पंचायत गौरिया में भूमि चिह्नित की गई थी। तत्कालीन प्रधान मुन्नी देवी, लेखपाल अमरीश और नगर पालिका परिषद लखीमपुर के ईओ की मौजूदगी में कान्हा गोआश्रय स्थल के लिए भूमि का आवंटन किया गया। तीन साल बीत गए, लेकिन अब तक उस भूमि पर कोई निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। मैदान में घास-फूस ही नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले इस भूमि की नपाई हुई थी, जिसमें कान्हा गोआश्रय स्थल बनाया जाना था। एक बार मिट्टी को मृदा परीक्षण के लिए भेजा गया था, जिसके बाद से अब तक कोई देखने तक नहीं आया है।
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कुछ चिह्नित नगर निकाय क्षेत्रों में कान्हा गोआश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं, जिनमें पहली किस्त से काम कराया गया है। दूसरी किस्त मिलने में देरी होने से निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका है। कुछ दिन पूर्व ही दूसरी किस्त जारी की गई है, जिससे निर्माण फिर से प्रारंभ होगा। जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कराकर लावारिस पशुओं को संरक्षित कराया जाएगा।
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-संजय कुमार सिंह, एडीएम
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