धौरहरा/रमिया बेहड़। जिला मुख्यालय के उत्तर में पड़ोसी देश नेपाल में पहाडों पर हो रही लगातार मूसलाधार बारिश से गांजर में बह रही शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। घाघरा के उफनाने से सैकड़ों गांव कटान के मुहाने पर बढ़ रहे हैं, जबकि नदियों के निचले हिस्से में बसे गांवों के जमींदोज होने का खतरा बढ़ने लगा है।
गांवों में कटान करती हुई घाघरा की दूरी महज सौ मीटर शेष बची है। इससे धौरहरा विकासखंड रमिया बेहड़ क्षेत्र के सुजानपुर, लालापुर, माथुरपुर और देवी पुरवा के दो हजार परिवारों में दहशत है। यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू नहीं किया तो चारों गांव का वजूद मिट जाएगा और हजारों परिवार बेघर हो जाएंगे।
पिछले दो दशक में जहां तराई क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है तो वहीं दर्जनभर गांव भी कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। लेकिन शासन-प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी अपने को अनजान बना हुआ है। पूर्व प्रधान अच्छेलाल समेत कई ग्रामीणों का कहना है कि कटान को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही है कि बचाव कार्य के नाम पर अब तक कोई काम शुरु नहीं हुआ है।
खेतीबाड़ी नदी में गवां चुके ग्रामीणों में अब अपना आशियाना उजड़ने का खौफ है। अभी नदी धीमी चाल से कटान कर रही है, लेकिन जलस्तर और बढ़ने पर इन गांवों को खतरा पहुंचेगा। एक हफ्ता पहले बाढ़ व बचाव के लिये कुछ बारदाना आया था, जिसे दो दिन पूर्व बाढ़ खंड विभाग के कर्मचारी यह कहते हुए उठा ले गए कि यहां बचाव कार्य संभव नहीं है। कहीं और काम शुरू किया जाएगा।
चकदहा के ग्रामीणों ने एसडीएम को दिया शिकायती पत्र
धौरहरा। विकासखंड ईसानगर के ग्राम पंचायत चकदहा के दर्जनों ग्रामीण शनिवार को धौरहरा तहसील दिवस पर पहुंचकर उप जिला अधिकारी अनुराग सिंह को कटान रोकने के लिए शिकायती पत्र भी दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम पंचायत चकदहा, बहेलियन पुरवा व मांझी सुमाली आदि गांव में तटबंध का कोई भी कार्य आज तक नहीं किया गया। गांव वालों की कई हेक्टेयर जमीन घाघरा नदी में समाहित हो चुकी है। प्रशासन मूकदर्शक बना है। हमारी जमीन कटने के बाद अब घर कटने की बारी है। 300 प्रधानमंत्री आवास दर्जनों सोलर लाइट आदि घाघरा नदी के कटान के निशाने पर हैं, फिर भी शासन प्रशासन चुप्पी साधे है। संवाद