दुधवा के सलूकापुर बेस कैंप में महावत के साथ खेलती गौरी स्रोत :वन विभाग
लखीमपुर खीरी। बिजनौर के नजीबाबाद जंगल से रेस्क्यू कर दुधवा लाई गई नन्ही हथिनी गौरी यहां के हाथियों और महावतों से काफी घुल मिल गई है। आठ दिन में ही गौरी सलूकापुर बेस कैंप में रहने वाले हाथियों और महावत की लाडली बन गई है। पांच साल की दुर्गा के साथ वह काफी खुश है।
गौरी की देखभाल की जिम्मेदारी महावत इरशाद संभाल रहे हैं। चंद दिनों में ही इस शिशु का उनसे काफी लगाव हो गया है। तीन माह की इस नन्ही हथिनी को दुधवा टाइगर रिजर्व ने गोद लिया है। इसे 12 अक्तूबर की रात विशेष वाहन से दुधवा लाया गया था। दुधवा में इसका नामकरण करने के साथ उसका जोरदार स्वागत किया गया। आठ दिनों में गौरी महावत इरशाद से इतना घुल मिल गई है कि अधिकतर समय वह इरशाद के साथ ही रहती है।
वह कभी इरशाद के कंधे पर सूंड़ रखकर दुलार करती है, तो कभी उनकी गोद में सर रख देती है। इरशाद के साथ गौरी खूब मस्ती कर रही है। गौरी का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि गौरी पूरी तरह स्वस्थ है और बेहद खुश है।